आधुनिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग का मिलेगा प्रशिक्षण
(सभी तस्वीरें- हलधर)भारतीय कृषि अनुसंधान के मार्गदर्शन में भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान, भरतपुर ने कृषि क्षेत्र में रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते दुष्प्रभावों को रोकने के लिए, फसल उत्पादकता में वृद्धि और पर्यावरण में संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से एक व्यापाक जागरूकता अभियान की शुरुआत की है।
किसानों में जागरूकता
जहां, संस्थान के निदेशक डॉ. विजय वीर सिंह ने वरिष्ट वैज्ञानिकों के साथ विमर्श करते हुए स्पष्ट किया कि इस अभियान का मूल लक्ष्य मृदा परिक्षण आधारित संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, जैविक स्त्रोतों और जैव उर्वरकों के उपयोग के संतुलित उपयोग के प्रति किसानों में जागरूकता और क्षमता विकास सुनिश्चित करना है।
किसानों को वैज्ञानिक कृषि का ज्ञान
अभियान के अंतर्गत किसानों को रासायनिक उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग, गुणवत्तापूर्ण बीज चयन, आवश्यकता-आधारित सिंचाई, संतुलित पशु आहार और मृदा उर्वरता संवर्धन के वैज्ञानिक तरीकों से अवगत कराया जाएगा।
रासायनिक उर्वरकों पर घटे निर्भरता
इसके साथ ही, प्राकृतिक संसाधन इकाई के अध्यक्ष डॉ. रामस्वरूप जाट ने गोबर खाद और हरी खाद को अपनाकर रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाने का आह्वान किया, जबकि नोडल अधिकारी डॉ. मोहन लाल दोतानिया ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर उर्वरक उपयोग को अनिवार्य बताया। यह अभियान टिकाऊ कृषि की दिशा में एक सार्थक और दूरगामी कदम है।