एंटीबायोटिक के बिना थनैला का इलाज! ऊंट के स्टेम सेल पर शोध शुरू
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। दुधारू पशुओं में थनैला रोग ठीक करने के लिए पशु को दी जाने वाली एंटीबायोटिक की खुराक पशु स्वास्थ्य को बिगाड़ रही है। इससे पशुओं में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) की चुनौती बढ़ रही है। इस स्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, बीकानेर के वैज्ञानिक एंटीबायोटिक फ्री उपचार तकनीक विकास के लिए ऊंट के स्टेम सेल उपयोग पर शोध शुरू करेंगे। संस्थान के निदेशक डॉ. अनिल पूनियां ने बताया कि थनैला रोग के चलते एक-एक प्रभावित ऊंट पर औसतन लगभग 2,179 वार्षिक आर्थिक भार सामने आया है। इससे पशुपालकों को दुग्ध उत्पादन में गिरावट के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
रोजाना 13 हजार करोड़ का नुकसान
गौरतलब है कि केन्द्र को ऊंट के स्टेम सेल आधारित थनैला रोग के एंटीबायोटिक-मुक्त उपचार संबंधी अनुसंधान परियोजना मंजूर हुई है। इस परियोजना का उद्देश्य भविष्य में एंटीबायोटिक-मुक्त उपचार पद्धति विकसित करने करना है। बता दें कि देश में थनैला रोग से प्रतिवर्ष 13 हजार करोड़ का नुकसान होता है।
शोध में यह होगा काम
परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. रतन कुमार चौधरी ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत ऊंट के विभिन्न ऊतकों से मेसेनकाइमल स्टेम सेल्स प्राप्त कर उनकी विशेषताओं का अध्ययन किया जाएगा। प्रयोगशाला और प्रायोगिक मॉडल के माध्यम से थनैला रोग में इनके संभावित प्रभाव का मूल्यांकन और आगामी चरणों में उपचार की सुरक्षा का प्रीक्लिनिकल अध्ययन किया जाएगा।
क्या है थनैला रोग
थनैला रोग होने पर ऊंट सहित सभी दुधारू पशु के थन में सूजन और संक्रमण हो जाता है। इससे दूध का उत्पादन घटने के साथ उसकी गुणवत्ता भी प्रभावित होती है और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। वर्तमान में इस बीमारी के उपचार के लिए मुख्य रूप से एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इनके लगातार उपयोग से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ता जा रहा है, जिससे दवाएं धीरे-धीरे बेअसर हो सकती हैं।