यूरिया-डीएपी के लिए नई मुसीबत, FFS सिस्टम में उलझे किसान 

नई दिल्ली 07-Sep-2026 02:26 PM

यूरिया-डीएपी के लिए नई मुसीबत, FFS सिस्टम में उलझे किसान 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। कृषि विभाग के द्वारा प्रदेश के 19 जिलों में लागू किया गया फ्रेम वर्क फॉर फर्टिलाइजर (एफएफएस) सिस्टम के तहत यूरिया-डीएपी खाद लेना किसानों के लिए अग्नि परीक्षा जैसा साबित हो रहा है। क्योंकि, यह सिस्टम गैस बुकिंग कराने जैसा कतई नहीं है। क्योंकि, इस सिस्टम में इतनी पेचीदगियां है कि आम किसान को अपने लिए घर बैठे खाद ही बुक नहीं करवा सकता। बता दें कि पढ़े-लिखे कृषि अधिकारियों के भी यह व्यवस्था दिमाग में नहीं उतर पा रही है। हालात यह है कि खाद बुक कराने के दो-तीन बाद भी किसान खाली हाथ ही नजर आ रहा है। शायद यही कारण है कि विभाग के द्वारा चयनित जिलों में इस नई कवायद का जमकर विरोध हो रहा है। वहीं, सोशल मीडिया पर भी किसानों के बयानों की बाढ़ आई हुई है। साथ ही, क्षेत्रीय अधिकारियों के लिए भी यह व्यवस्था नया दर्दनाक साबित हो रही है। गौरतलब है कि राजसमंद और सिरोही में पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के आधार पर कृषि विभाग ने दो चरणों में इस प्रोजेक्ट को प्रदेश के 19 जिलों में विस्तार दिया है। लेकिन, सिस्टम इतना उलझा हुआ है कि आम किसान को खाद मिलना दूर की कौड़ी बनता जा रहा है। किसानों का कहना है कि नई व्यवस्था का विरोध नहीं है। हमें केवल खाद मिलने से मतलब है। उन्होंने बताया कि गैस बुकिंग जैसी व्यवस्था नहीं होने तक फिलहाल किसान को राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है।

नहीं रुक पाई टैगिंग 

यूरिया, डीएपी जैसे उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और दुरुपयोग को रोकने के लिए कृषि विभाग ने खाद वितरण की यह नई व्यवस्था लागू की है। लेकिन, फिलहाल विभाग के इन उद्देश्यों की पूर्ति होती नजर नहीं आ रही है। क्योंकि, यह सिस्टम आधार कार्ड नंबर और ओटीपी पर आधारित है। उदाहरण के तौर पर आधार विक्रेता ने बुकिंग कराने वाले किसान का आधार कार्ड नंबर फीड कर दिया और जो खाद लेने गया है, उसका आधार नंबर नहीं लगाया तो पोस मशीन एरर बता देती है और विक्रेता किसान को खाली हाथ लौटा देता है। गौरतलब है कि इस नई व्यवस्था के बाद भी किसानों को टैगिंग से राहत नहीं मिली है। वहीं, यूरिया-डीएपी की भी ऊंची दर चुकानी पड़ रही है।

आसान नहीं खाद की बुकिंग 

खाद बुक कराने के लिए किसान एफएफएस पोर्टल को खोलेगा। इसके बाद जमीन दर्ज करेगा। इसके बाद चाहा गया खाद ग्रेड सहित दर्ज करना होगा। खाद स्वयं लेने जायेंगे अथवा कोई और, तो अपने आधार, नाम और मोबाइल नंबर के साथ खाद लेने जा रहे व्यक्ति की भी समान जानकारी भरनी होगी। इसके बाद क्यूआर कोड नजर आयेगा। नजदीक दुकान का चयन करना होगा। फिर ओटीपी आयेगा। यदि किसान की जगह दूसरा कोई खाद लेने पहुंचा है तो उसका आधार कार्ड, फिंगर प्रिंट जरूरी होगा। उसके बाद जाकर खाद मिलेगा।

अब यह दिए आदेश 

आयुक्त कृषि महेश कुमार गोयल ने उन जिले के किसानों को राहत दी है, जिनका भूमि रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध नहीं है। ऐसे डाकरा गांवों के किसानों को आधार और जनाधार से खाद वितरण के आदेश दिए गए हैं।

बीएसके ने बनाई समिति

उधर, भारतीय किसान संघ ने किसानों को आ रही समस्याओं को सुलझाने के लिए संगठन स्तर पर 8 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इस समिति में सुहास मनोहर, मिथिलेश वालिया, शिवराज पुरी, डॉ. लोकेश गुर्जर, रामगोपाल शर्मा, बीके द्विवेदी, डॉ. रामहरी मीना और जयपुर प्रांत के दो प्रगतिशील किसानों को शामिल किया गया है।

8 को देंगे धरना 

उधर, किसान महापंचायत ने टोंक जिले के किसानों को हो रही परेशानी को लेकर धरना प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। महापंचायत के युवा प्रदेशाध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद चौधरी ने बताया कि 8 सितम्बर को जिले की 7 ग्राम सेवा सहकारी समिति मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया जायेगा।


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