अब एआई बताएगा गुलाबी सुंडी का खतरा, किसानों को मिलेगा अलर्ट 

नई दिल्ली 07-Sep-2026 01:56 PM

अब एआई बताएगा गुलाबी सुंडी का खतरा, किसानों को मिलेगा अलर्ट 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

हलधर टाइम्स / पीयूष शर्मा

जयपुर। गुलाबी सुंडी पर अब एआई से नजर रखी जायेगी। जी हां, सच यही है। प्रदेश के गंगानगर और हनुमानगढ़ जिले में चुनिंदा खेतों पर कृषि वैज्ञानिकों ने डिजिटल पहरा बैठा दिया है। इस तकनीक की खासियत यह है कि यह नर कीट को अपनी ओर आकर्षित करेगी। इससे गुलाबी सुंडी की प्रजनन प्रक्रिया बाधित होगी और फसली नुकसान रोका जा सकेगा। दरअसल, केंद्रीय कपास अनुसंधान केंद्र, (सीआईसीआर) नागपुर ने श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिले में करीब 10 खेतों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी आधारित स्मार्ट फेरोमोन ट्रैप लगाए हैं। इससे रियल टाइम डेटा मिलेगा। गौरतलब है कि कपास उत्पादक किसानों के लिए गुलाबी सुंडी आतंक का पर्याय बन चुकी है। इसके चलते प्रदेश में कपास बुवाई क्षेत्र में गिरावट आने लगी है। इस साल भी इसका असर कपास पर देखने को मिला है। प्रदेश में कपास की बुवाई 7.20 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 5.39 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिमटकर रह गई है। संस्थान के द्वारा क्षेत्रीय केंद्र सिरसा ने श्रीगंगानगर जिले में 23 बीबी पदमपुर, कालियां, हकमाबाद, सुंदरपुरा, 9 एलएनपी और हनुमानगढ़ जिले में भाखरांवली, चक हीरासिंहवाला, नाथवाना, मक्काछेडा, हिरणांवाली और उभेवाला तीन टीकेआर में एआई स्मार्ट ट्रैप लगाए हैं। यह कवायद पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर हुई है। तकनीक सटीक साबित हुई तो आगामी वर्ष में ट्रैप की संख्या बढ़ाई जा सकती है। बेहतर कॉटन प्रोजेक्ट से जुड़े अमीलाल ने बताया कि सिरसा केंद्र के द्वारा एआई स्मार्ट फेरोमोन ट्रैप को लेकर जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

सेंसर और कैमरे से निगरानी

एआरएस श्रीगंगानगर के डॉ. रघुवीर सिंह मीणा ने बताया कि एआई स्मार्ट फेरोमोन ट्रैप डिवाइस की बैटरी सौर ऊर्जा से चार्ज होती है। इससे डिवाइस खेतों में हर मौसमी परिस्थितियों में 24 घंटे चालू रहता है। ट्रैप में मादा कीट की गंध और हार्मोनयुक्त कैप्सूल लगाया जाता है। इससे आकर्षित होकर नर वयस्क कीट इसमें आता है तो ट्रैप में लगा कैमरा रियल टाइम पिक्चर और सेंसर कीटों की संख्या की गणना कर सर्वर रूम सिरसाम को रियल टाइम रिपोर्ट भेजता है। इससे तापमान और वातावरण की नमी की मॉनिटरिंग भी की जा रही है। अगर कीट की संख्या आर्थिक क्षति स्तर (ईटीएल) ज्यादा होगी तो इसका अलर्ट जारी होगा।

ट्रैप कैसे काम करता है

इस ट्रैप में एक कैमरा लगा होता है। यह कैमरा फेरोमोन की गंध से आकर्षित होकर ट्रैप में चिपके कीटों की तस्वीरें लेता है। ये तस्वीरें रियल-टाइम में क्लाउड सर्वर और किसानों के मोबाइल फोन पर भेजी जाती हैं। मशीन लर्निंग के माध्यम से इन तस्वीरों का विश्लेषण कर गुलाबी सुंडी की पहचान और गिनती होती है। इससे किसानों को हर घंटे कीटों की जानकारी मिलती है और वे तुरंत कीटनाशक का उपयोग कर सकते हैं।

कपास की खेती में चुनौतियां

2022 से राजस्थान में कपास का रकबा तेजी से घट रहा है। गुलाबी सुंडी का प्रकोप इसकी मुख्य वजह है। विशेषज्ञों का कहना है कि कीट-प्रतिरोधी बीटी कॉटन भी इस कीट का शिकार हो रहा है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है और वे कपास की खेती से दूर हो रहे हैं।

किसानों के लिए नई उम्मीद

यह नई तकनीक आर्थिक नुकसान को कम करने की क्षमता रखती है। पहले फेरोमोन ट्रैप्स का उपयोग होता था, लेकिन कीटों की गिनती और निगरानी में मानव श्रम की कमी थी। एआई आधारित स्मार्ट सिस्टम समय पर कीट प्रबंधन की सलाह देता है, जिससे नुकसान को आर्थिक सीमा से नीचे रखा जा सकता है।

लागत थोड़ी ज्यादा

जानकारी के अनुसार इस ट्रैप की कीमत 35,000 से 40,000 रुपये है, जो छोटे किसानों के लिए एक चुनौती है। लेकिन इसके परिणाम बहुत प्रभावी हैं। यह सिस्टम रियल-टाइम में कीटों की जानकारी देता है, जिससे फसल को बचाने के लिए तुरंत कार्रवाई की जा सकती है। पारंपरिक तरीकों में अनुमान लगाना पड़ता था, लेकिन यह तकनीक ज्यादा सटीक है।

कैसे तैयार हुई एआई ट्रैप

एआई ट्रैप में कैमरा मॉड्यूल, एआई/कंप्यूटर विजन सिस्टम, मौसम सेंसर, जीएसएम-वाईफाई कम्यूनिकेशन, सोलर पैनल, रीचार्जेबल बैटरी, फेरोमोन ल्योर, चिपचिपा ट्रैपिंग लाइनर, क्लाउड/सर्वर सिस्टम शामिल है।

किसान को क्या फायदा होगा

सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान को रोजाना ट्रैप खोलकर हाथ से कीट गिनने की जरूरत नहीं रहेगी। क्योंकि, इसमें लगा एआई ट्रैप गुलाबी सुंडी कीट पर लगातार निगरानी रखता है। साथ ही, मौसम और कीटों की संख्या का रिकॉर्ड रखता है। किसान के मोबाइल पर पेस्ट अलर्ट, एडवाइजरी मिलती है। इससे कीटनाशक की खपत में कमी आने की उम्मीद है।

 


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