बदलते मौसम से जीरे की फसल खतरे में, झुलसा रोग सक्रिय

नई दिल्ली 22-Jan-2026 12:41 PM

बदलते मौसम से जीरे की फसल खतरे में, झुलसा रोग सक्रिय

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। मौसम में आ रहे बदलाव ने जीरा उत्पादक किसानों की चिंता डाल दिया है। फसल में झुलसा रोग फैलने की संभावना कृषि विशेषज्ञों ने जताई है। ग्राहृय परीक्षण केन्द्र, तबीजी के अधिकारियों का कहना है कि आकाश में बादल छाये रहने की स्थिति में इस रोग के प्रकोप संभावना बढ जाती है। ऐसे में किसानों का सतर्क रहने की जरूरत है। गौरतलब है कि प्रदेश में 6-7 लाख हैक्टयर क्षेत्र में किसान जीरा फसल की बुवाई करते है। क्योंकि, बीजीय मसाला फसलों में जीरा एक महत्वपूर्ण फसल हैं। जीरे का उपयोग सभी सब्जियों, सूप, आचार, सॉस आदि को स्वादिष्ट बनाने के लिए किया जाता हैं। लेकिन, इस फसल में कई हानिकारक रोगों का प्रकोप होता हैं। इससे किसानों का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। 

क्या है झुलसा रोग

फार्म के कृषि अनुसंधान अधिकारी (पौध व्याधि) डॉ. जितेन्द्र शर्मा ने बताया कि जीरे की झुलसा रोग एक कवक जनित रोग हैं इसको सामान्य भाषा में इसको काल्या रोग के नाम से भी जाना जाता हैं। फसल में फूल आने वाली अवस्था में अगर आकाश में बादल छाये रहे तो इस रोग का प्रकोप होने की संभावना बढ जाती है। 

ऐसे बचाएं फसल को

उन्होंने बताया कि इस रोग से बचाव के लिए बुवाई के 30-35 दिन बाद 2 ग्राम थायोफेनेट मिथाइल प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिडकाव करें अथवा रोग के लक्षण दिखाई देने पर डाईफेनोकोनाजॉल का 0.5 मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिडक़ाव करें। साथ ही, 15-15 दिन के अंतराल पर दूसरा और तीसरा छिडक़ाव करें।