बदनोर के गुलाबी लहसुन को मिलेगा राष्ट्रीय पुरस्कार
(सभी तस्वीरें- हलधर)पाली। बदनोर की गुलाबी लहसुन किस्म अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान दर्ज कराने जा रही है। ब्यावर जिले के बदनोर क्षेत्र की बदनोर-जयमल जैविक कृषक उत्पादक कंपनी’ को वर्ष 2024-25 के प्रतिष्ठित प्लांट जीनोम सेवियर कम्युनिटी अवॉर्ड के लिए चुना गया है। भारत सरकार के पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण, नई दिल्ली की ओर से यह सम्मान 12 नवंबर को प्रदान किया जाएगा। इस उपलब्धि के पीछे कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों की अहम भूमिका रही है। कुलगुरु प्रो. वीरेंद्र सिंह जैतावत के मार्गदर्शन में केवीके के वैज्ञानिकों ने बदनोर गुलाबी लहसुन की विशिष्ट पहचान, पारंपरिक खेती और जैव विविधता से जुड़े पहलुओं का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण किया। केवीके अध्यक्ष डॉ. एम.एस. चांदावत ने नाबार्ड के सहयोग से इस किस्म की खूबियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उद्यान विभाग के कृषि अधिकारी शिवराज सिंह का भी सहयोग रहा।
रंग, सुगंध और भंडारण क्षमता है खास
बदनोर गुलाबी लहसुन की सबसे बड़ी पहचान इसकी कलियों और कंदों पर दिखाई देने वाली गुलाबी रंगत है। इसकी सुगंध और तीखापन सामान्य सफेद लहसुन की तुलना में अधिक बताया जाता है। उचित परिस्थितियों में इसके कंद करीब एक साल तक सुरक्षित रखे जा सकते हैं। इसकी कुछ गांठों में एकल कली (सिंगल क्लोव) विकसित होने की विशेषता भी देखने को मिलती है। बदनोर क्षेत्र के रतनपुरा, भैरूपुरा, भादसी और भोजपुरा सहित आसपास के गांवों में किसान लंबे समय से इस किस्म के बीज को सहेजते और इसकी खेती करते आ रहे हैं।