बाजरा-ज्वार अपनाने के लिए किसानों को जागरूक कर रहा कृषि विभाग

नई दिल्ली 04-Nov-2026 06:55 PM

बाजरा-ज्वार अपनाने के लिए किसानों को जागरूक कर रहा कृषि विभाग

(सभी तस्वीरें- हलधर)

बूंदी। जलवायु परिवर्तन और घटते जल संसाधनों के बीच राजस्थान के किसानों के लिए बाजरा, ज्वार सहित मोटे अनाज की खेती बेहतर विकल्प बन सकती है। इसी को देखते हुए ब्रिक्स सतत जीवनशैली सप्ताह के तहत कृषि विभाग बूंदी ने मिलेट्स की खेती को बढ़ावा देने के लिए जिले में जागरूकता अभियान शुरू किया है।

अभियान के तहत कृषि पर्यवेक्षक मुख्यालयों और ब्लॉक स्तर पर कृषक गोष्ठियां आयोजित कर किसानों को श्री अन्न एवं मोटे अनाज की उपयोगिता बताई जा रही है। विभाग का जोर पारंपरिक फसलों के संरक्षण, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने पर है। कृषि विभाग के अनुसार बाजरा और ज्वार राजस्थान की जलवायु के अनुकूल फसलें हैं। इन्हें अपेक्षाकृत कम पानी की जरूरत होती है और कम उर्वरता वाली भूमि में भी इनका उत्पादन संभव है। इन फसलों में कीट एवं बीमारियों का प्रकोप भी तुलनात्मक रूप से कम रहता है। ऐसे में कम बारिश और सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों के किसानों के लिए ये फसलें जोखिम कम करने का विकल्प बन सकती हैं।

मिलेट्स केवल खेती ही नहीं, बल्कि पोषण और पशुपालन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं। बाजरा-ज्वार से मिलने वाला चारा पशुओं के लिए उपयोगी है। इससे फसल उत्पादन के साथ पशुपालन करने वाले किसानों को भी फायदा मिल सकता है। वहीं, इन फसलों को बढ़ावा देने से भूजल संरक्षण, कृषि जैव विविधता और स्थानीय खाद्य प्रणालियों को मजबूती मिलेगी।

विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी जमीन, स्थानीय जलवायु और उपलब्ध सिंचाई संसाधनों के अनुसार बाजरा, ज्वार सहित अन्य मोटे अनाज की खेती अपनाएं। उपयुक्त किस्मों, बुवाई के समय और फसल प्रबंधन की जानकारी के लिए कृषि पर्यवेक्षकों एवं कृषि अधिकारियों से संपर्क करें।


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