धान खेतों में अंकुरित, रबी लक्ष्य से 44 फीसदी

नई दिल्ली 14-Nov-2025 12:03 PM

धान खेतों में अंकुरित, रबी लक्ष्य से 44 फीसदी

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। खरीफ में कुदरत का कहर झेल चुके  किसान रबी बुवाई में तेजी दिखा रहे हैं। क्योंकि, किसान की माली हालत रबी पैदावार से ही सुधर सकती है। शायद यही कारण है कि किसान बिना देर किए फसल की बुवाई करने में जुटे हुए हैं। बारिश के कारण सरसों में पिछडऩे के बाद किसानों ने गेहूं-जौ-चना की बुवाई शुरू कर दी है। वहीं, पश्चिमी जिलों में मसाला फसल जीरा और मेथी की बुवाई शुरू हो चुकी है। हाड़ौती संभाग में लहसुन और धनिये की बुवाई ने जोर पकड़ लिया है। हालांकि, लहसुन के बाजार भाव कम रहने से हाड़ौती में लहसुन के बुवाई क्ष्ेात्र में गिरावट देखने को मिल सकती है। कृषि जानकारों का कहना है कि इस वर्ष प्रदेश के बारानी क्षेत्र में चना बुवाई का आंकड़ा बढ़ सकता है। क्योंकि, चने की बुवाई 64 फीसदी हो चुकी है। कृषि विशेषज्ञो का कहना है कि अक्टूबर में हुई बारिश के चलते किसान समय पर सरसों की बुवाई नहीं कर पाएं है। इस कारण बारानी क्षेत्रों में चने की अच्छी बुवाई होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि इस वर्ष कृषि विभाग ने चना बुवाई के लिए साढे 21 लाख हैक्टयर का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसकी तुलना में 13.80 लाख हैक्टयर में चने की बुवाई हो चुकी है। जो पिछले वर्ष सामानावधि बुवाई से करीब तीन लाख हैक्टयर ज्यादा है। पिछले साल समानावधि में 10.75 लाख हैक्टयर क्षेत्र में ही चने की बुवाई हो पाई थी। लेकिन, इस वर्ष मौसम के अनुकूल होने के चलते किसानों ने चने की बुवाई में रूचि ली है। गौरतलब है कि दूसरी रबी फसलों की बुवाई लक्ष्य से काफी पीछे चल रही है। कृषि जानकारों का कहना है कि चने की फसल को ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं होती है। यदि समय पर मावठ हो जाती है तो किसान को सिंचाई समस्या से दोचार नहीं होना पड़ेगा। उधर, प्रदेश में रबी फसलों की बुवाई एक करोड़ 20 हजार हैक्टयर लक्ष्य के मुकाबले 53.08 लाख हैक्टयर क्षेत्र में हो चुकी है। अजमेर, जयपुर, दौसा, जिले में चने की बुवाई निर्धारित लक्ष्य के करीब पहुंच चुकी है। 

पश्चिमी में जीरा-मेथी

उधर, तापमान में कमी के बाद बाड़मेर, जैसलमेर, पाली, नागौर, जोधपुर, जालौर सहित दूसरे जिलों में जीरा और मेथी की बुवाई किसानों ने शुरू कर दी है। हालांकि, बुवाई का आंकड़ा अभी कम है। लेकिन, समय के साथ तेजी दिखा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों की माने तो इस साल पश्चिमी जिलों में जीरा और मेथी के साथ-साथ ईसबगोल बुवाई की अच्छी संभावना है। निराई-गुड़ाई शुरू अगेती बुवाई की गई सरसों और चने की फसल में किसानों ने निराई-गुड़ाई तैयारियां शुरू हो चुकी है। बता दें कि एक माह के बाद कृषि वैज्ञानिक दोनों फसलों में निराई-गुड़ाई की सिफारिश करते है। ताकि, खेत से खरपतवार निकल जाने से पौधों की अच्छी बढ़वार हो सके। बता दें कि अगेती सरसों में डोढ़ी बनना शुरू हो गई है। 

सरसों की धार पतली

प्रदेश में इस वर्ष सरसों बुवाई का आंकड़ा ठिठका नजर आ रहा है। स्थिति ऐसी ही बनी रही तो सरसों की बुवाई लक्ष्य से 15-20 फीसदी तक पिछड़ सकती है। बता दें कि सरसों बुवाई के लिए इस साल 36 लाख हैक्टयर का लक्ष्य तय किया गया है। लक्ष्य की तुलना में अभी तक 28.45 लाख हैक्टयर क्षेत्र में सरसों बुवाई दर्ज हुई है। जो लक्ष्य का 79 फीसदी है। कृषि अधिकारियों का मानना है कि ज्यादा बारिश के चलते सरसों की बुवाई कम दर्ज हुई है।  इस लिहाज से कहा जा सकता है कि इस साल सरसों की बुवाई लक्ष्य से 85-90 प्रतिशत रहने की संभावना है।  

धान से फुटे अंकुर

उधर, हाड़ौती संभाग में मोंथा तूफान के असर से तीन दिन चली बारिश के दौर ने खेतों को जलमग्र कर दिया। इससे कटी पड़ी धान की फसल खेतों में ही अंकुरित होने लगी है। बरसात में भीगने से धान बदबू मारने लगा है और काला पड़ गया, जिसका भाव भी मंडी में कम ही मिलने की सभावना है। उधर, हाड़ौती दौरे पर गए कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने बताया कि सरकार ने हाड़ौती संभाग में धान की फसल में शत प्रतिशत खराबा मान लिया है। किसानों को उचित सहायता दी जायेगी। 

सीताफल की गुणवत्ता खराब

मेवाड़ क्षेत्र में सीताफल का अच्छा उत्पादन होने की उम्मीद थी। लेकिन, गत दिनों हुई बारिश से सीताफल एक साथ पक गए। वहीं बड़े आकार के फल पकने के बाद तोडऩे से पहले ही नीचे गिर रहे है, जिससे अधिकांश फल खराब हो जाते है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। 

1700 करोड़ की राहत

कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने बताया कि सरकार जल्द ही अतिवृष्टि पीडि़त किसानों को राहत पहुंचाने जा रही है। सरकार करीब 1700 करोड़ रूपए की सहायता किसानों और आपदा पीडि़तों को देगी। इसमें 500 करोड़ रूपए हाड़ौती संभाग के लिए और 500 करोड़ रूपए आपदा राहत फं ड के शामिल है। उन्होने बताया कि अतिवृष्टि पीडि़त किसानों को राहत राशि दो तरह से दी जायेगी। उन्होने बताया कि जो किसान पीएम फसल बीमा योजना के तहत बीमित है, उनको योजना के तहत सहायता दी जायेगी। वहीं, शेष सभी किसानों को आपदा राहत कोष से राहत प्रदान की जायेगी। 

(बुवाई लाख हैक्टयर में)


ट्रेंडिंग ख़बरें