दोगुना आय के लिए किसान धान के बाद उगाएं सरसों
(सभी तस्वीरें- हलधर)भरतपुर। सरसों अनुसंधान संस्थान, भरतपुर में सरसों की खेती पर तीन दिवसीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में संस्थान के निदेशक डॉ. विजय वीर सिंह ने कहा कि किसान बेहत्तर लाभ, कम लागत और कम संसाधन में तैयार होने वाली फसल का उत्पादन करें। इससे खेती लाभ का सौदा बनी रहेगी। उन्होने कहा कि सरसों का उत्पादन बढाने के लिए कई किस्मों का विकास हो चुका है। यदि किसान धान के बाद सरसों की बुवाई करें खेल भी खाली नहीं रहेगा। तिलहन के साथ-साथ किसान की आय भी बढेगी। डॉ. सिंह ने बताया कि उन्नत किस्मों चयन, समय पर बुवाई, संतुलित उर्वरक और सिंचाई प्रबंधन, बीज उपचार, कीट-रोग नियंत्रण जैसी वैज्ञानिक विधियाँ राइ-सरसों की सफल खेती की आधारशिला हैं। कार्यक्रम को संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार शर्मा ने भी सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक को सही समय और उचित तरीके से उपयोग करके प्रति हैक्टयर फसल की उत्पादकता को बढाया जा सकता है। उन्होंने किसानों को मृदा स्वास्थ्य के लिए उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर जोर दिया। प्रशिक्षण के दौरान संस्थान के वैज्ञानिक विनोद कुमार, अरुण कुमार, नितीश रतन भारद्वाज, मुरलीधर मीणा ने किसानों को सरसों की खेती से जुड़ी नवीन जानकारी प्रदान की। वही, कृषि विभाग के योगेश शर्मा ने कृषि विकास योजनाओं और वीरेश भगौर ने एफपीओं गठन के बारे में बताया। इस प्रशिक्षण में झारखंड राज्य के किसानों ने भाग लिया।