खरीफ के बाद रबी की बंपर फसल ने बढ़ाई चिंता, किसान क्यों परेशान?
(सभी तस्वीरें- हलधर)देशभर में अच्छे मानसून के बाद रबी फसलों की बुवाई में काफी बढ़त देखी जा रही है। इससे पहले खरीफ सीजन में फसलों की बुवाई में 4 प्रतिशत से अधिक वृद्धि देखी गई थी। हालांकि, अधिक बारिश की वजह से कई राज्यों में खरीफ फसलों को काफी नुकसान भी पहुंचा।
वहीं, अच्छे मानसून से खरीफ फसल उत्पादन में बढ़ोतरी देखी गई। लेकिन, खरीफ फसलों के भावों ने किसानों को निराश किया है। खरीफ फसलों के कमजोर बाजार भाव ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीर खींच दी है। क्योंकि किसानों को इस बात का डर सता रहा है कि खरीफ सीजन की तरह ही रबी सीजन पर भी कमजोर बाजार भाव की मार पड़ सकती है।
रबी बुवाई में पिछले साल का रिकॉर्ड टूटा
इस चालू रबी सीजन में बुवाई का पिछले साल का रिकॉर्ड टूट गया है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 7 नवंबर तक देश में 130.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की बुवाई हो चुकी है। पिछले साल की अवधि की तुलना में यह 27.12 प्रतिशत अधिक है। रबी फसल की बुवाई में इस उछाल के पीछे मानसून सीजन के बाद मौसम का साफ रहना और मिट्टी में उपयुक्त नमी होना बड़ी वजह है। इस बार देश में अच्छे मानसून के बाद सूखे मौसम और समय से पूर्व सर्दी की शुरुआत ने गेहूं की बुवाई के लिए उपयुक्त माहौल तैयार किया है। वहीं, अच्छी बरसात से देशभर के बड़े जलाशयों और भूजल का स्तर भी बढ़ा है। प्रमुख 161 जलाशयों में कुल क्षमता के खिलाफ 90.06 प्रतिशत पानी मौजूद है। जलाशयों में जल भंडारण का यह आंकड़ा बीते 10 साल के औसत से 111 प्रतिशत अधिक है।
खरीफ की फसलें एमएसपी से नीचे बिक रही
दरअसल, देश के किसान वर्ग की प्रमुख चिंता फसलों का बाजार भाव है। खरीफ की प्रमुख फसलें उनके एमएसपी भाव से भी नीचे बिक रही हैं, जिससे देशभर मे किसानों की आय पर सीधा असर हुआ है। जानकारी के अनुसार, 5 नवंबर तक मूंग की कीमतें एमएसपी के मुकाबले लगभग 20 प्रतिशत तक गिर गईं। इसी तरह, रागी, मूंगफली और सोयाबीन भी न्यूनतम समर्थन मूल्य से करीब 12 प्रतिशत नीचे बिक रहा था। फिलहाल बाजार में गेहूं का भाव भी एमएसपी से कम है। हालांकि, गेहूं की कीमतें अभी 2,775 से 2,800 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रही हैं। गेहूं का यह भाव एमएसपी से अधिक है, लेकिन बीते महीनों की तुलना में काफी कम है। खरीफ फसलों की कीमतों में कमी के पीछे इस सीजन में अच्छी उपज है। विशेषज्ञ इसके साथ ही खाद्य तेलों का बाहर से बड़ी मात्रा में आयात और कुछ कृषि उत्पादों पर शून्य आयात शुल्क को भी जिम्मेदार मान रहे हैं।
केंद्र सरकार ने खरीफ फसल उत्पादक किसानों की स्थिति को भांपते हुए कुछ जरूरी कदम उठाए हैं। इसी क्रम में 31 अक्टूबर को केंद्र सरकार ने पीले मटर पर 30 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाया। वहीं, दलहन-तिलहन की खरीद के लिए 1,15,068.83 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी। सरकार के इस फैसले का असर आगामी दिनों में दिखने की उम्मीद है। अगर फिर भी बाजार भाव में बदलाव नहीं हुआ तो अच्छी फसल के बावजूद देशभर के किसानों को आर्थिक नुकसान होना तय है।