गिरती डिग्री के बीच रबी लक्ष्य से 73 फीसदी
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। नवम्बर में जारी हुए सर्दी के यलो अलर्ट ने सबके कान खड़े कर दिए है। इस बात की गवाही दिन-रात का गिरता पारा देने लगा है। इससे सर्दी चमक उठी है। साथ ही, रबी बुवाई भी खेतों में अपनी चमक बिखेरने लगी है। गौरतलब है कि प्रदेश में लक्ष्य से 73 फीसदी बुवाई कार्य पूरा हो चुका है। किसान गेहूं और मसाला फसल बुवाई के कार्य में जुटे हुए है। मौसम में आए बदलाव से कोहरे के साथ ही सर्दी ने रंग दिखाना शुरू कर दिया है। मौसम के अनुकूल होने की चमक किसानों के चेहरों पर नजर आने लगी है। उधर, रबी फसल बुवाई निर्धारित एक करोड़ 20 लाख हैक्टयर लक्ष्य के मुकाबले 88. 24 लाख हैक्टयर क्षेत्र में हो चुकी है। बुवाई के आंकड़ो को देखते हुए इस वर्ष सरसों और चना बुवाई लक्ष्य से थोड़ी पिछड़ सकती है। क्योंकि, दोनों ही फसलों की बुवाई निर्धारित लक्ष्य से 8 से 10 फीसदी कम देखने को मिल रही है। किसानों से मिली जानकारी के अनुसार मौसम में ठंडक़ घुलने से बुवाई के लिए ट्रेक्टर की मांग तेजी से बढ़ी है। कृषि विभाग का मानना है कि ठंड चमकने से गेहूं का जोरदार और समय पर अंकुरण होने के आसार है। वहीं, सरसों और चना की वृद्धि भी अच्छी होगी। गौरतलब है कि सरसों बुवाई का वैज्ञानिक समय समाप्त हो चुका है। जबकि, गेहूं की बुवाई मध्य दिसम्बर तक की जा सकती है। इस लिहाज से माना जा रहा है कि इस वर्ष प्रदेश में गेहूं के साथ-साथ मसाला फसलों की बुवाई अच्छी होगी।
लक्ष्य से दूर जौ बुवाई
प्रदेश में इस वर्ष जौ की बुवाई लक्ष्य से 21 फीसदी पिछड़ी हुई नजर आ रही है। इससे कहा जा सकता है कि इस साल बारानी क्षेत्रों में चने की अच्छी बुवाई हुई है। गौरतलब है कि चने की बुवाई लक्ष्य से 93 फीसदी हो चुकी है। इस साल चना बुवाई के लिए सरकार ने साढे 21 लाख हैक्टयर का लक्ष्य रखा था। कृषि विभाग के आंकडों पर नजर डाले तो 19.90 लाख हैक्टयर क्षेत्र में इस फसल की बुवाई हो चुकी है। वहीं, सरसो की बुवाई साढे 32 लाख हैक्टयर क्षेत्र में सम्पन्न हो चुकी है। इन दोनों ही फसलो की बुवाई लक्ष्य से 8-10 फीसदी पिछड़ी हुई है। नजर डाले जौ बुवाई पर तो जौ की बुवाई लक्ष्य से 21 फीसदी पिछड़ी हुई है। 3.80 लाख हैक्टयर लक्ष्य की तुलना में 3 लाख हैक्टयर क्षेत्र में जौ की बुवाई हो चुकी है।
बढेगा गेहूं का रकबा
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल गेहूं बुवाई का रकबा पिछले साल से ज्यादा रह सकता है। क्योंकि, दिसम्बर शुरू होने से पूर्व ही प्रदेश में लक्ष्य से 60 फीसदी गेहूं की बुवाई हो चुकी है। जबकि, किसान 20 दिसम्बर तक इस फसल की बुवाई कर सकेंगे। गौरतलब है कि कृषि विभाग ने इस साल 36 लाख हैक्टयर क्षेत्र में गेहूं बुवाई का लक्ष्य रखा है। लक्ष्य के मुकाबले 21.74 लाख हैक्टयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी है।
जीरा बुवाई ने पकड़ा जोर
पश्चिमी राजस्थान में तापमान अब अनुकूल होने के चलते जीरे की बुवाई ने प्रगति दर्शाई है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. एमएल मेहरिया ने बताया कि रबी सीजन की फसलों के लिए दस डिग्री से कम तापमान अनुकूल होता है। वैसे 12 डिग्री तापमान तक भी फसलें ग्रोथ करती हैं। एक अनुमान के अनुसार जीरे की बुवाई दो से ढ़ाई लाख हैक्टयर में हुई हैं। जीरे की सर्वाधिक बुवाई बाड़मेर जिले में हुई है। इसके अलावा नागौर, जैसलमेर, झुंझुनूं, जोधपुर, जिले में बुवाई हुई है। वहीं, ईसबगोल की बुवाई भी समय के साथ बढ़ रही है।
चने में उखटा
प्रदेश के सवाईमाधोपुर, दौसा, टोंक सहित दूसरे जिलों में चने की फसल में उखटा और जडग़लन रोग का प्रकोप देखने को मिला है। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि चना फसल को जडग़लन और उखटा रोग से बचाने के लिए किसान 500 ग्राम कार्बेण्डाजिम 50 डब्ल्यूपी को 5-6 किग्रा रेत मिलाकर सिंचाई से पूर्व प्रति बीघा की दर से पौधे के जड़ क्षेत्र में भुरकाव करें।
संतरे में काली मस्सी
संतरा बगीचों में काली मस्सी कीट का प्रकोप देखने को मिल रहा है। इससे किसान चितिंत है। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि काली मस्सी के नियंत्रण के लिए किसान क्यूनॉलफॉस 1.25 मिली, ड़ाइमिथोएट 2 मिली, ट्राइजोफॉस 2 मिली. अथवा प्रोपेनोफॉस 1.5 मिली. प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर शक्तिचालित स्प्रेयर से इस प्रकार छिडक़ाव करें कि घोल पत्तियों की निचली सतह तक पहुंच जाए।
पशुओं को ऐसे बचाएं सर्दी से
कृषि विज्ञान केन्द्र भीलवाड़ा के प्रभारी डॉ. सीएम यादव ने बताया कि पशुपालकों को पशुओं के लिए अपने घर के आस-पास ओट में एक कच्चा/पक्का पशु आवास बनाना चाहिए। जो कि हवा के रूख के विपरीत हो, आवास को साफ-सुथरा, सूखा रखें। पशुओं को ठण्ड से बचाव के लिए उनके ऊपर बारदाना, बोरी गर्म कम्बल डालकर ओढ़ाकर रखें। ऊंटों -घोड़ों पर झूल डालें, छोटे पालतु बछड़ों को गर्म कपड़े पहना कर ठण्ड से बचाएं। पशुओं को खुले में नहीं छोड़े। पशुओं को संतुलित आहार दिया जाए। जिसमें दाना, गुड़ खल की उचित मात्रा शामिल हो। इन दिनों प्रसव का समय भी होने के कारण ब्याने के बाद पशुओं के बच्चों का विशेष ध्यान रखा जाए। मां बच्चे को उचित आवास/ आहार प्रदान करें। पशु के बीमार होने पर पशु चिकित्सक से इलाज करवाएं।
चलेगी शीतलहर
भारतीय मौसम विभाग ने आगामी दो सप्ताह का मौसम का पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार 27 नवंबर से 3 दिसंबर के बीच पश्चिमी राजस्थान में शीतलहर का प्रकोप रहेगा। न्यूनतम तापमान सामान्य से 2-4 डिग्री कम रहेगा।
बुवाई क्षेत्र लाख हैक्टयर में।