किसान आय बढौत्तरी में सहभागी बने आदान विक्रेता
(सभी तस्वीरें- हलधर)चित्तौडग़ढ़। कृषि विज्ञान केन्द्र, पर 15 दिवसीय खुदरा उर्वरक विके्रता पाठ्यक्रम का श्ुाभारंभ सयुंक्त निदेशक कृषि दिनेश जागा की उपस्थिति में हुआ। इस मौके पर संयुक्त निदेशक जागा ने कहा कि कृषि आदान विके्रता किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती से जोडऩे मेें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है। अंधाधुंध उर्वरक और कीटनाशी के उपयोग से उत्पादन में ठहराव आ रहा है। साथ ही, कृषि लागत भी बढ़ रही है। मानव और पशुधन स्वास्थ्य पर भी इसके दुष्प्रभाव सामने आ रहे है। ऐसे में आदान विके्रता किसानों को अनपयोगी आदानों की बिक्री ना करें। जहां तक संभव हो किसानों को जैविक और प्राकृतिक तौर-तरीको से कीट-रोग नियंत्रण के लिए प्रोत्साहित करें। कार्यक्रम के दौरान उपनिदेशक उद्यान डॉ. शंकरलाल जाट ने उर्वरकों के सन्तुलित उपयोग और मृदा परीक्षण, उप निदेशक आईपीएम ओपी शर्मा ने समन्वित कृषि पद्धत्ति के बारे में जानकारी दी। वहीं, प्रशिक्षण समन्वयक डॉ रतन लाल सोलकी ने कृषि के छ प्रमुख आयामों यथा जमीन पानी, बीज, उर्वरक मशीनीकरण, वातावरण और किसान पर अपनी बात रखी। इस प्रशिक्षण में जिले की ग्रामीण क्रय विक्रय सहकारी समितियो से कुल 50 प्रशिक्षणार्थियों ने भाग ले रहे है।