धान के अवशेष नहीं जलाये, 30 नवंबर से पहले सरसों की बुवाई 

नई दिल्ली 30-Oct-2026 05:00 PM

धान के अवशेष नहीं जलाये, 30 नवंबर से पहले सरसों की बुवाई 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

रायपुर । राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान ‘खेत बचाओ अभियान–रबी के तहत किसान जागरूकता और सरसों बीज वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। अनुसूचित जाति एवं जनजातीय उपयोजना के लाभार्थी किसानों को सरसों की उन्नत किस्म DRMR-150-35 का बीज वितरित किया गया। इससे करीब 270 एकड़ क्षेत्र में सरसों की खेती को बढ़ावा मिलेगा।

संस्थान के निदेशक डॉ. पीके. राय ने  किसानों से फसल अवशेषों का वैज्ञानिक प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग और टिकाऊ कृषि तकनीक अपनाने का आह्वान किया। साथ ही रबी सीजन में दलहनी और तिलहनी फसलों का क्षेत्र बढ़ाने पर जोर दिया।

संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज शर्मा ने किसानों को धान कटाई के बाद खेत में बचे अवशेष नहीं जलाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि मल्चर की मदद से अवशेषों को छोटे टुकड़ों में काटकर मिट्टी में मिलाने से जैविक पदार्थ बढ़ता है और भूमि की उर्वरता में सुधार होता है।

उन्होंने सरसों की DRMR-150-35 किस्म की जानकारी देते हुए बताया कि वैज्ञानिक फसल प्रबंधन और 30 नवंबर से पहले बुवाई करने पर करीब 10 से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त की जा सकती है। यह किस्म लगभग 95 से 110 दिन में पककर तैयार हो जाती है। कम बीज दर और सीमित सिंचाई में बेहतर उत्पादन की संभावना के कारण यह किसानों के लिए रबी की लाभकारी तिलहनी फसल बन सकती है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष किसानों के साथ जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। संचालन डॉ. के.सी. शर्मा एवं डॉ. प्रियंका मीना ने किया।


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