राहत में देरी बर्दाश्त नहीं, केंद्र ने बनाया रबी का रोडमैप

नई दिल्ली 03-Nov-2026 12:23 PM

राहत में देरी बर्दाश्त नहीं, केंद्र ने बनाया रबी का रोडमैप

(सभी तस्वीरें- हलधर)

नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में सूखे, बाढ़, चक्रवाती प्रभाव और अनियमित बारिश से प्रभावित कृषि क्षेत्र को देखते हुए केंद्र सरकार ने किसानों को राहत देने और रबी सीजन की तैयारियों को लेकर सक्रियता बढ़ा दी है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ देशभर में खरीफ फसलों की कटाई, मौसमी परिस्थितियों और रबी बुवाई की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को राहत देने में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। फसल नुकसान का आकलन और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दावों का भुगतान प्राथमिकता से किया जाए।

बैठक में कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सहित सूखे से प्रभावित राज्यों की स्थिति पर विशेष चर्चा हुई। वहीं, अत्यधिक बारिश और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भी किसानों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। चौहान ने कहा कि संकट की घड़ी में केंद्र सरकार किसानों के साथ खड़ी है और प्रभावित राज्यों के साथ समन्वय बनाकर हरसंभव मदद की जाएगी। उन्होंने एनडीआरएफ के तहत फसल क्षति का त्वरित आकलन कराने पर जोर दिया।

कम पानी में पैदा होने वाली फसलों पर जोर

रबी सीजन की रणनीति में कम पानी और कम लागत वाली फसलों को प्राथमिकता देने के संकेत दिए गए हैं। कृषि मंत्री ने कहा कि खरीफ फसलों की कटाई के बाद खेतों में बची नमी का अधिकतम उपयोग करते हुए रबी बुवाई को गति दी जाए। जिन क्षेत्रों में सिंचाई के पानी की सीमित उपलब्धता है, वहां किसानों को चना, सरसों, मसूर और मोटे अनाज की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए। तापमान में उतार-चढ़ाव को देखते हुए जलवायु अनुकूल और गर्मी सहन करने वाली उन्नत किस्मों के बीज भी किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।

खाद-बीज का पर्याप्त स्टॉक, जिला स्तर तक आपूर्ति की तैयारी

रबी सीजन में खाद और प्रमाणित बीजों की उपलब्धता को लेकर मंत्रालय ने पर्याप्त भंडार होने का दावा किया है। समीक्षा में यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीके का पर्याप्त स्टॉक बताया गया। राज्यों के साथ समन्वय कर जिला स्तर तक उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बुवाई के समय किसानों को खाद के लिए भटकना नहीं पड़े।

हर सप्ताह होगी समीक्षा

कृषि मंत्री ने कहा कि वे स्वयं हर सप्ताह कृषि क्षेत्र की स्थिति की समीक्षा करेंगे। जरूरत पड़ने पर राज्यों के मुख्यमंत्रियों और संबंधित अधिकारियों से सीधे संवाद कर समस्याओं का समाधान कराया जाएगा। बैठक में यह भी बताया गया कि धान, गेहूं, मक्का, चना, मसूर, अरहर, सोयाबीन और सरसों जैसी प्रमुख फसलों के बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर चल रहे हैं। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल रहा है।


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