मानसून अटका, कपास बुवाई में तेजी

नई दिल्ली 02-Jun-2026 12:21 PM

मानसून अटका, कपास बुवाई में तेजी

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिले में कपास बुवाई में अच्छी प्रगति दर्ज हो रही है। कृषि विभाग के मुताबिक प्रदेश में सवा तीन लाख हैक्टयर क्षेत्र में कपास फसल की बुवाई हो चुकी है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि इस साल कपास का बुवाई क्षेत्र बढने का अनुमान है। उधर, प्रदेश के करीब आठ जिलों में तेज बारिश के साथ नींबू के आकार के ओले गिरे है। वहीं, आंधी से जान-माल के नुकसान के भी समाचार है। बारिश से दिन-रात के तापमान में थोड़ी कमी आई है। लेकिन, मौसम विभाग ने पश्चिमी विक्षोभ का असर समाप्त होने के बाद तापमान में बढौत्तरी और हीटवेब का दौर फिर से शुरू होने की संभावना जताई है। 

यह करें किसान
वर्तमान मौसमी परिस्थितियों को देखते हुए खजूर, किन्नू, संतरा, नींबू और  ककडी, तरबूज, खरबूज, टिंड़ा, टमाटर  में सिंचाई करें। साथ ही, बेर उत्पादक किसान कटाई-छटाई करें।

फल मक्खी का नियंत्रण
खरबूजा, तरबूज और ककडी में फल मक्खी के नियंत्रण के लिए मैलाथियान 50 ईसी की 1 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिडक़ाव करे। 

औसत से कम रहेगी बारिश
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने मॉनसून को लेकर दूसरा पूर्वानुमान जारी किया गया है। जिसमें पूर्वाेत्तर राज्यों को छोडक़र देशभर में मानसून कम रहने की बात कही है। विभाग के मुताबिक इस बार मानसून सामान्य से 90 फीसदी रहने का अनुमान है। विभाग के महानिदेशक डॉ. एम. महापात्र ने बताया कि मानसून अभी श्रीलंका में अटका हुआ है। सात दिन के बाद इसके केरल पहुंचने की उम्मीद है। इस साल जून से सितम्बर के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान देश के अधिकतर हिस्सों में औसत से कम बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया है।

खरीफ पर पड़ेगा असर
दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन का सीधा असर खरीफ सीजन के दौरान फसलों की बुआई पर पड़ता है। क्योंकि, अधिकतर खरीफ फसलों की बुवाई जून और जुलाई महीने में हो जाती है। 


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