कतार की छुट्टी, अब होगी खाद की बुकिंग, रुकेगी कालाबाजारी
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर । यूरिया - डीएपी की क्राइसिस को रोकने के लिए कृषि विभाग सिरोही और राजसमंद जैसी उर्वरक वितरण व्यवस्था जल्द ही प्रदेश के एक दर्जन से अधिक जिलों में लागू करने जा रहा है । नई व्यवस्था के तहत अब खाद लेने के लिए किसानों को कतार में लगने की जरुरत नहीं रहेगी । दरअसल विभाग उर्वरक की कालाबाजारी-जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल का विस्तार करने जा रहा है। बाद में चरणबद्ध तरीके से पूरे राजस्थान में यह व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके तहत किसान घर बैठे अपनी जरूरत के अनुसार उर्वरक की बुकिंग कर सकेंगे और नजदीकी अधिकृत रिटेलर से खाद ले सकेंगे। प्रमुख शासन सचिव कृषि मंजू राजपाल ने उर्वरकों की समीक्षा बैठक के दौरान कुछ ऐसे संकेत दिए हैं । उन्होंने कहा कि जिलों की वास्तविक मांग के आधार पर आपूर्ति तत्काल अतिरिक्त उर्वरक उपलब्ध कराया जाए।
मांग से ज्यादा मिला यूरिया
बैठक में बताया गया कि खरीफ 2026 में अप्रैल से अगस्त तक केंद्र सरकार ने राजस्थान को 9.28 लाख मैट्रिक टन यूरिया आवंटित किया है। 1 अप्रैल के स्टॉक सहित अब तक 13.12 लाख मैट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया जा चुका है। अगस्त में करीब 50 हजार मैट्रिक टन अतिरिक्त यूरिया की आपूर्ति होनी है। वही 3.80 लाख मैट्रिक टन डीएपी की मांग के मुकाबले 3.41 लाख मैट्रिक टन डीएपी उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा 1.71 लाख मैट्रिक टन एनपीके और 3.76 लाख मैट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध कराया गया है। वर्तमान में प्रदेश में 2.59 लाख मैट्रिक टन यूरिया, 67 हजार मैट्रिक टन डीएपी, 79 हजार मैट्रिक टन एनपीके और 1.69 लाख मैट्रिक टन एसएसपी का स्टॉक उपलब्ध है।
खाद की होगी बुकिंग 48 घंटे तक वैध रहेगा बुकिंग टोकन
फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल की व्यवस्था में किसान अपनी जरूरत के अनुसार खाद की बुकिंग कर सकेंगे। बुकिंग के बाद जारी टोकन 48 घंटे तक वैध रहेगा। इस अवधि में उर्वरक नहीं लेने पर दोबारा बुकिंग करनी होगी। इस डिजिटल व्यवस्था से वास्तविक जरूरत वाले किसानों को प्राथमिकता मिलेगी और कालाबाजारी, जमाखोरी, अनियमित वितरण व अनावश्यक खरीद पर नियंत्रण में मदद मिलेगी। किसानों को खाद के लिए लंबी कतारों और एक केंद्र से दूसरे केंद्र के चक्कर लगाने से भी राहत मिलेगी।
गांव-गांव जागरूकता अभियान
आयुक्त कृषि नरेश कुमार गोयल ने बताया कि कृषक सखी, कृषक साथी और कृषि पर्यवेक्षकों के माध्यम से गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। किसानों को फसलवार उर्वरक की सही मात्रा और उपयोग का समय बताया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिलों की मांग के अनुसार उर्वरकों की आपूर्ति लगातार जारी है और जरूरत बढ़ने पर अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।