सरकार चुनाव में मस्त, किसान मंडियों में त्रस्त
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। सरकार चुनावो में मस्त है और किसान कृषि उपज मंडियों में त्रस्त नजर आ रहा है। हालात यह है कि किसान को एमएसपी के लिए भी तरसना पड़ रहा है। गौरतलब है कि अधिकांश खरीफ फसलों के प्रति क्विंटल भाव एमएसपी से कम बोले जा रहे है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकार के ध्यान नहीं देने से धान, मूंग, मूंगफली, बाजरा आदि फसलों की खरीद बाधित हो रही है। नियमों की पेचीदगी के बीच किसान फंसे हुए हैं। केवल मूंग और मूंगफली की बात करें तो ऑनलाइन पंजीयन के बाद हजारों किसान टोकन के इंतजार में बैठे हैं। टोकन जारी होने के बाद ही खरीद शुरू हो पाएगी। परंतु सरकार ने एक दो जगहों पर गिरदावरी में अनियमितता की वजह से इसकी जांच पूरी होने तक टोकन जारी करने पर रोक लगा दी है। इससे सरकारी खरीद की समय सीमा और आगे बढ़ती हुई नजर आ रही है। राजफैड के स्थानीय अधिकारियों के अनुसार अगले सप्ताह तक टोकन जारी करने के आदेश प्राप्त हो सकते हैं।
इतने भाव का अंतर
मंडिय़ों में मूंग के 5600 से 6640 रुपए प्रति क्विंटल बोले जा रहे है। जबकि, इस बार सरकार ने मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8768 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। इस तरह किसानों ने तीन हजार से चार हजार रुपए प्रति क्विंटल का नुकसान हो रहा है।