कृषि ग्रंथ बृहत्कृषिपराशरः

नई दिल्ली 15-Aug-2026 03:12 PM

कृषि ग्रंथ बृहत्कृषिपराशरः

(सभी तस्वीरें- हलधर)

बृहत्कृषिपराशरः एक प्राचीन भारतीय ग्रन्थ है, जिसकी रचना सदियों पहले पराशर ऋषि ने की थी। ऋषि पराशर ने इसमें कृषि के विभिन्न प्रकार, विकास, वृष्टि, वर्षा, विभिन्न ऋतुओं के लक्षण और धान्य के विकास को अपने विचारों के जरिए गहनता से समझाया है। धर्म-ग्रन्थों में कृषि का बड़ा महत्व बताया गया है। यहां तक कि कृषि कर्म में किसान अपने दोषों से भी मुक्त हो जाता है। हमारे ऋषि-मुनियों ने कृषि को पवित्र कर्म माना है और कृषि का महत्व समझाया है।

  1. अन्यद्वृष्टिज्ञानमाह -

उत्तिष्ठत्यण्डमादाय यदा चैव पिपीलिका ।
भेकः शब्दायतेऽकस्मात् तदा वृष्टिर्भवेद् ध्रुवम् ॥66॥

(मेघजन्य उमस के दौरान) यदि चींटियाँ अपने अण्डों को उठाकर बिल से अन्यत्र जाती हुई दिखाई दें और अचानक ही मेंढक टरटराने लगें तो उस समय निश्चित ही वर्षा होती है।


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