राजस्थान की शान ऊंट पर मंडरा रहा संकट, जानिए वजह
(सभी तस्वीरें- हलधर)"प्रतिवर्ष अंतर्राष्ट्रीय ऊंट दिवस 22 जून को मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य ऊंट की महत्ता को समझना और उनके अस्तित्व को बचाना है। पिछले कुछ दशकों से ऊंटों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। ऊंट अपनी विशेष शारीरिक संरचना और जैविक विशेषताओं के कारण रेगिस्तान की विषम और कठोर जलवायु में जीवित रह पाता है। इसे रेगिस्तान का जहाज भी कहा जाता है। आइए जानते है ऊंट और उससे सम्बंधित कुछ विशेष बातें -"
ऊंट और राजस्थान का लोक जीवन
रेगिस्तान की विषम परिस्थितियों में ऊंट सिर्फ एक पशु नहीं, बल्कि मरुधरा की जीवंत पहचान है। राजस्थान में ऊंट को पुराने समय से ही परिवहन, कृषि, धार्मिक- सांस्कृतिक कार्यों में उपयोग में लिया जाता रहा है। ऐसा माना जाता है कि राजस्थान में ऊंट लाने का श्रेय लोक देवता पाबूजी को जाता है। पाबूजी को ऊंटों के देवता के रूप में भी पूजा जाता है। बीकानेर के महाराजा गंगासिंह के पास तो गंगा रसाला नामक सैनिकों और ऊंटों की विशेष रेजिमेंट थी।
ऊंटनी का दूध
ऊंटनी का दूध शुष्क क्षेत्रों में एक पौष्टिक आहार के रूप में जाना जाता है। गाय के दूध की तुलना में कम कोलेस्ट्रॉल, उच्च विटामिन सी और बायोएक्टिव पेप्टाइड की उपस्थिति के कारण यह महत्वपूर्ण पोषण संबंधी लाभ प्रदान करता है। कई लेखों में इसके मधुमेह, ऑटिज्म और आंतों से संबंधित रोगों के उपचार में काम में लिये जाने की भी जानकारी मिलती है।
अनुकूल शारीरिक रचना
ऊंट की विशेष शारीरिक रचना उसे रेगिस्तान की विषम परिस्थितियों के अनुकूल बनाती है। इसका बड़ा शरीर गर्मी को धीमी गति से बढ़ने देता है और लम्बी टांगे शरीर को धरती की गर्मी से बचाती है। चौड़े पैर बालू में नहीं धंसते, मोटे होंठ कांटेदार पौधों को चबाने में मदद करते है। लम्बी पलकें, बालों वाली भवें और भौहें आंखों और श्वासनली को धूल से बचाती है। यह पानी की कमी में भी लम्बे समय तक जीवित रह सकता है। कम मेटाबोलिक दर, बेहतर जल अवशोषण और तापमान नियंत्रण की क्षमता इसे रेगिस्तानी वातावरण के लिए आदर्श बनाती है।
ऊंट का आहार प्रबंधन
ऊंट को बंद बाड़े में रखने की बजाय खुले में चरने दिया जाता है। ऊंट वाणिज्यिक चारे की बजाय प्राकृतिक और जंगली वनस्पति खाते है। ऊंट की यह आदत उनके दूध के अनूठे स्वास्थ्य लाभों को बनाए रखती है। ऊंटों का खान-पान अन्य पालतू पशुओं की तुलना में काफी अलग होता है, जिसमें मुख्य रूप से रेगिस्तान में उगने वाली कंटीली झाड़ियाँ, पेड़, कठोर वनस्पतियाँ और घास शामिल है। सूखे मौसम के दौरान ये मुख्य रूप से सदाबहार झाड़ियों, पेड़ों की पत्तियों और जमीन पर गिरी सूखी पत्तियों पर निर्भर रहते है।
ऊंट पालन की चुनौतियां
अधिकांश लोग ऊंट के उत्पादों के मुकाबले गाय-भैंस के उत्पादों को अधिक पसंद करते है, जिससे ऊंट के उत्पादों की मांग सीमित है। पशुपालकों द्वारा वैज्ञानिक तरीके की बजाय पारंपरिक तरीके से ऊंट पालन करना और जानकारी का अभाव भी मुख्य चुनौती है।