सर्दियों में पशुशाला को गर्म और सुरक्षित रखने के लिए करें ये काम
(सभी तस्वीरें- हलधर)सर्दियों के मौसम में तापमान तेजी से गिरता है। ऐसे में पशुओं को केवल बाहर की ठंड से बचाना ही काफी नहीं होता, बल्कि पशुघर के भीतर का आंतरिक वातावरण (सूक्ष्म वातावरण) सही रखना भी बेहद जरूरी है। यदि पशुघर का सूक्ष्म वातावरण संतुलित नहीं है, तो पशुओं का दूध उत्पादन घट जाता है और वे निमोनिया जैसी सांस की बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।
सूक्ष्म वातावरण बिगड़ने के कारण:
हवा की आवाजाही पूरी तरह बंद करना: किसान अक्सर ठंड से बचाने के लिए पशुघर को चारों तरफ से प्लास्टिक अथवा बोरी से पूरी तरह सील कर देते हैं, जिससे अंदर नमी और अमोनिया गैस एकत्र हो जाती है.
गीला बिछावन: गोबर और मूत्र के जमाव से फर्श पर नमी बढ़ती है, जिससे अमोनिया गैस तेजी से बनती है.
पशुओं की अधिक संख्या: क्षमता से अधिक पशु एक ही शेड में रखने से सांस द्वारा छोड़ी गई भाप से आर्द्रता बढ़ जाती है.
प्रबंधन के व्यावहारिक उपाय:
वेंटिलेटर: ऊपर से खुले रखें ताकि हवा का प्रवाह बना रहे. पशुघर के साइड पर्दों को नीचे से बंद रखें ताकि सीधी ठंडी हवा पशुओं के शरीर पर न लगे. लेकिन, छत के पास 1-2 फीट का वेंटिलेशन खुला छोड़ें ताकि गर्म और अस्वस्थ हवा ऊपर से बाहर निकल सके.
सूखी बिछावन: फर्श को गर्म और सूखा रखने के लिए 4-6 इंच मोटी पराली, भूसा अथवा लकड़ी का बुरादा बिछाएं. यह जमीन की ठंडक को पशु तक पहुंचने से रोकता है और मूत्र को सोखकर नमी कम करता है. नियमित सफाई और चूने का छिड़काव करें.
अमोनिया गैस का नियंत्रण: प्रतिदिन गोबर और मूत्र की निकासी करें. फर्श को सुखाने के लिए उस पर सूखा चूना छिड़कें, यह अमोनिया की गंध को कम करता है और कीटाणुओं को मारता है.
धूप का प्रवेश: दिन के समय जब धूप निकले, तो पूर्वी अथवा दक्षिणी दिशा के पर्दे हटा दें ताकि सूरज की किरणें सीधे पशुघर के अंदर पहुंच सकें. इससे नमी नहीं होगी और मच्छर-मक्खियों से भी बचाव होगा.
नवजात बछड़ों और मेमनों के लिए विशेष देखभाल
सर्दियों के मौसम में जन्म लेने वाले नवजात बछड़े और मेमने अति-शीत तनाव के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं. जन्म के समय उनका शरीर गीला होता है और शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कम होती है. यदि शेड का सूक्ष्म वातावरण सही न हो, तो उनमें हाइपोथर्मिया (शरीर का तापमान अत्यधिक गिरना), निमोनिया और डायरिया (दस्त) जैसी जानलेवा समस्याएं हो सकती हैं.
जन्म के तुरंत बाद शारीरिक प्रबंधन:
जन्म के 15 मिनट के भीतर सुखाना: शरीर का तापमान तुरंत सामान्य करें. बच्चे के जन्म लेते ही उसके शरीर से द्रव को साफ सूती कपड़े या पराली से रगड़कर सुखाएं. शरीर गीला रहने पर वाष्पीकरण से तापमान तेजी से गिरता है.
प्रथम 2 घंटे में माँ का पहला दूध (खीस) पिलाना: रोग प्रतिरोधक क्षमता और आंतरिक गर्ماहट के लिए नवजात को उसकी शारीरिक क्षमता के अनुसार (शरीर के वजन का 10 प्रतिशत) गर्म खीस (माँ का पहला गाढ़ा दूध) पिलाएं. यह शरीर को अंदर से ऊर्जा प्रदान करता है.
नाल का उपचार: संक्रमण रोकने के लिए नाल को 7 प्रतिशत टिंचर आयोडीन से साफ करें और बच्चे को तुरंत सूखे, गर्म बिछावन वाले बक्से में स्थानांतरित करें.
कपड़े पहनाना: गर्म कपड़े अथवा ग्राफ जैकेट का प्रयोग करें. ठंडी रात में बाड़ों और मेमनों के शरीर पर पुराने टाट के बोरे से बनी जैकेट अथवा गर्म कपड़ा पहनाएं, जिससे उनके पेट और छाती को ढका जा सके.