गोपालन बना कमाई का मजबूत आधार, हर महीने 30 हजार की आमदनी !
(सभी तस्वीरें- हलधर)
विरात्रानगर, बाड़मेर। कहते है कि मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती है। इस बात क साबित कर दिखाया है चूतराराम गोदारा ने। जिनके पास खेत तो नहीं है। लेकिन, पसीना बहाने के लिए पशुपालन है। उनका कहना है कि पशुपालन से मासिक 30 हजार रूपए का शुद्ध लाभ मिल रहा है। किसान चूतराराम ने हलधर टाइम्स को बताया कि बाड़मेर से 100 किलोमीटर दूर पैतृक गांव है। लेकिन, धर्मपत्नी की नौकरी के चलते बाड़मेर का होकर रह गया। उन्होंने बताया कि घर पर खाली बैठे क्या करता। कुछ काम करने की सोच के साथ पशुपालन से जुड़ गया। इसी का परिणाम है कि घर बैठे 30 हजार रूपए की मासिक बचत हो रही है। जबकि, चारा औ पानी की भी कीमत चुका रहा हॅू। उन्होंने बताया कि पहले तो पशुधन का प्रबंधन परम्परागत तौर-तरीकों से करता था। लेकिन, बाद में पशुधन का प्रबंधन वैज्ञानिक तरीके से करने लगा। इससे दुग्ध उत्पादन लागत में कमी आई है। वहीं, दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ पशुधन का स्वास्थ्य भी बेहत्तर बना रहता है।
45 लीटर दुग्ध का उत्पादन
उन्होंने बताया कि वर्तमान में मेरे पास 3 थारपारकर और 2 सहीवाल नस्ल की गाय है। प्रतिदिन 42-45 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल रहा है। दुग्ध की बिक्री 60 रूपए प्रति लीटर की दर से उपभोक्ताओं को कर रहा हॅू। इससे सारा खर्च निकालने के बाद 30 हजार रूपए की शुद्ध बचत मिल जाती है।
नेपियर के साथ गोबर गैस
उन्होंने बताया कि पशुओं के लिए नेपियर घास का उत्पादन ले रहा हॅू। साथ ही, ईंधन लागत घटाने के लिए गोबर गैस संयंत्र लगा चुका हॅू। उन्होंने बताया कि पहले पशुओं की बाट तैयार करने और दुग्ध गर्म करने में एक सिलेंडऱ लगता था। अब सिलेंडर के साथ-साथ घरेलू ईंधन का खर्च शून्य हो चुका है।
स्टोरी इनपुट: डॉ. रावताराम भाखर, पशुपालन विभाग, बाड़मेर