दुग्ध उत्पादक से बीज उत्पादक बने, अब कमाते 14 लाख सालाना
(सभी तस्वीरें- हलधर)
बाजड़, बूंदी। कहते है दुनिया चमक देखती है। लेकिन, चमक के पीछे छिपा होता है, एक संघर्ष। क्योंकि, सफलता निरंतर मेहनत के साथ-साथ नवाचारी सोच मांगती है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है किसान चरणजीत सिंह ने। जो भले ही मैट्रिक पास है। लेकिन, अब धान और गेहूं बीज उत्पादन के मास्टर बन चुके है। उनका कहना है कि हर साल बीज उत्पादन प्रोग्राम लेता हॅू। इससे बेहत्तर आमदनी मिल जाती है। वहीं, हार्वेस्टर, रिपर सहित कई आधुनिक मशीने मेरे पास है। इससे भी अच्छी आय मिलती है। उन्होने बताया कि खेती से सालाना 13-14 लाख रूपए की शुद्ध बचत मिल जाती है। किसान चरणजीत ने हलधर टाइम्स को बताया कि मेरे पास 22 बीघा जमीन है। सिंचाई के लिए पानी की कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि 10वीं पास करने के साथ ही खेती से जुड़ गया। पहले आय बढाने के लिए पशुपालन पर फोकस किया। लेकिन, लेबर की समस्या आने पर समय के साथ पशुओं की संख्या कम कर दी। दुग्ध से मिलने वाली आमदनी की भरपाई के लिए बीज उत्पादन करने लगा। उन्होंने बताया कि कृषि विज्ञान केन्द्र, बूंदी से जुडऩे के बाद बीज उत्पादन कार्यक्रम मेरे लिए सोने पर सुहागा जैसा बन गया। अब खेत में धान और गेहंू की फसल तो तैयार होती ही है। साथ ही, इन दोनों फसलो का बीज भी तैयार हो रहा है। उन्होंने बताया कि बीज उत्पादन से जुडऩे के बाद लाभ बढाने के लिए मशीनो की आवश्यकता भी महसूस हुई। जैसे-जैसे लाभ बढ़ता गया, आधुनिक मशीनों की खरीद करता गया। यह मशीने भी मेरे लिए कमाई का जरिया बन गई। क्योंकि, अपना काम होने के बाद दूसरे किसानों के यहां धान और गेहूं की कटाई के लिए चला जाता हॅॅू। गौरतलब है कि किसान चरणजीत ने 28 बीघा जमीन लीज पर ली हुई है। इसमें भी फसल की पैदावार ले रहे है। उन्होंने बताया कि गेहूं और धान का 10-10 बीघा क्षेत्र में बीज तैयार करता हॅू। इस रकबे में करीब 80-90 क्ंिवटल बीज तैयार हो जाता है। बीज बिक्री की कोई परेशानी नहीं है। क्योंकि, जो संस्थाएं बीज तैयार करवाती है, वह अपना बीज ले जाती है। शेष रहने वाले बीज की बिक्री स्थानीय स्तर पर ही किसानों को कर देता हॅू। उन्होने बताया कि इस काम से सालाना 10-11 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है।
किचन गार्डन
उन्होंने बताया कि परिवार संबंधी सब्जी की आवश्यकता पूर्ति के लिए खेत पर ही किचन गार्डन लगाया हुआ है। सब्जी फसलों में भिंड़ी, बैंगन, मिर्च, तुरई, लौकी सहित अन्य मौसमी सब्जी फसल शामिल है। उन्होंने बताया कि उत्पादन ज्यादा होने पर खेत पर आने-जाने वालों को दे देता हॅू। इसके अलावा खेत में अमरूद, किन्नू, जामुन के पेड़ लगाएं हुए है। लेकिन, उत्पादित फ लों की बिक्री नहीं करता हॅू।
मशीनों से भी आय
उन्होंने बताया कि अपनी फसल कटाई के बाद क्षेत्र के दूसरे किसानों को मशीन किराय पर देता हॅू। इससे भी सालाना अच्छी आय मिल जाती है। उन्होंने बताया कि अधिकांश मशीन पंजाब से खरीदी हुई है। मशीनों से सालाना दो से ढाई लाख रूपए किराया मिल जाता है।
पशुपालन के साथ पोल्ट्री
उन्होंने बताया कि पशुधन में वर्तमान में मेरे पास दो गाय है। प्रतिदिन 20-25 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल रहा है। दुग्ध की बिक्री 40 रूपए की दर पर कर रहा हॅू। इससे पशुधन के साथ-साथ परिवार का दैनिक खर्च निकल जाता है। वहीं, पशु अपशिष्ट से वर्मी खाद तैयार कर रहा हॅॅू। दो वर्मी बेड़ मेरे पास है। इसके अलावा पोल्ट्री से सालाना 50-60 हजार रूपए की आमदनी मिल जाती है।
स्टोरी इनपुट: डॉ. एस.राम रूंडला, डॉ. महेश चौधरी, केवीके,बूंदी