MSc पास युवक ने डेयरी से बनाई डेढ़ लाख मासिक कमाई
(सभी तस्वीरें- हलधर)सावा, चित्तौडग़ढ़। पशुपालन से भी वंडऱ पैदा किया जा सकता है। कुछ ऐसा ही किया है शिव कुमार सेन। जिन्होंने एमएससी-गणित से करने के बाद खुद को एंटरप्रेन्योर बनाया। परिणाम रहा कि अब मासिक डेढ़ लाख रूपए का शुद्ध मुनाफा घर बैठे ले रहे है। साथ ही, दूसरों को भी रोजगार मुहैया करवा रहे है। पशुपालक शिव कुमार ने बताया कि परिवार के पास महज 4 बीघा जमीन है। जैसे-जैसे अपनी गणित से स्नातकोत्तर की उपाधि ली। उन्होंने बताया कि पढ़ाई के दौरान ही परिवार के आर्थिक हालात बदलने की ठान ली थी। इस कारण नौकरी की ओर नहीं गया। उन्होंने बताया कि साढ़े तीन साल पहले 10 गायों के साथ डेयरी व्यवसाय में कदम रखा। समय के साथ पशुधन की संख्या बढ़ती गई। साथ ही, दुग्ध उत्पादन और आमदनी का आंकड़ा। उन्होंने बताया कि पशुपालन का काम शुरू किया तो सूखे और हरे चारे की कमी सामने आई। इससे निजात पाने के लिए 10 बीघा जमीन लीज पर लेकर चारा फसलों का उगाना शुरू किया। इस जमीन पर पशु चारे के लिए नेपियर, चारा, गन्ना और मक्का का उत्पादन लेता हॅू। गन्ने की फसल से खेती का खर्च निकल जाता है।
ऐसे मिली सफलता
उन्होंने बताया कि पशुपालन से जुडऩे के बाद सरस का दुग्ध संकलन केन्द्र ले लिया। बाद में यह केन्द्र बीएमसी में तब्दील हो गया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मेरे पास 40 गाय और 10 भैंस है। प्रतिदिन दोनों समय का मिलाकर 175 लीटर दुग्ध का उत्पादन हो रहा है। 50 रूपए प्रति लीटर की दर से दुग्ध की बिक्री कर रहा हॅू। पशुओं के लिए 70 गुना 150 फीट आकार का शैड बनाया हुआ है। उन्होंने बताया कि सारा खर्च निकालने के बाद मासिक डेढ़ लाख रूपए की बचत मिल जाती है। बता दें कि किसान शिवकुमार ने दो जोड़ों को रोजगार दिया हुआ है
उन्नत बकरीपालन
उन्होंने बताया कि पशुपालन में सफलता मिलने के बाद बकरीपालन की ओर कदम बढ़ाया। इस व्यवसाय से जुड़े हुए करीब ढ़ाई साल हो चुके है। वर्तमान मेें 200 बकरियां मेरे पास है। इससे सालाना 50 हजार रूपए की आमदनी मिल जाती है।
वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन
उन्होंने बताया कि पशु अपशिष्ट का उपयोग वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने में कर रहा हॅू। वर्मी की 40 फीट लंबी एक दर्जन बेड़ मेरे पास है। हालांकि, अभी इससे आमदनी मिलना शुरू नहीं हुई है।