कभी करते थे DJ का काम, आज दूध बेचकर कमा रहे 70 हजार रुपये 

नई दिल्ली 16-Sep-2026 12:06 PM

कभी करते थे DJ का काम, आज दूध बेचकर कमा रहे 70 हजार रुपये 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

सांगानेर, भीलवाड़ा। काम करो ऐसा की पहचान बन जाए, कदम ऐसे चलो कि निशां बन जाए। पशुपालन से अपनी पहचान बनाने वाला किसान है किशन गोपाल टेलर। किशनगोपाल ने सात साल पहले घरेलू पशुधन के सहारे दुग्ध व्यवसाय में कदम रखा। अब देसी-विदेशी गौवंश का कुनबा काफी बढ़ चुका है। दुग्ध से मुनाफे का आंकड़ा 70 हजार रुपये महीने के पार पहुंच चुका है किशन गोपाल ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास 17 बीघा कृषि भूमि है। परिवार की आर्थिक स्थिति शुरू से ही सामान्य रही है। पढ़ाई में ज्यादा मन नहीं होने के चलते 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी। होश संभालने के बाद खेती बाड़ी से प्राप्त आय और परिवार के खर्च का गणित समझ आने के बाद साढे सात हजार मासिक की नौकरी शुरू कर दी। काफी साल नौकरी करता रहा। इसके बाद शादी-विवाह में डीजे साउण्ड का काम शुरू कर दिया। लेकिन, जो संतोष और मुनाफा गौपालन से मिला, उसका कोई मुकाबला नहीं है। इस कार्य से दो पैसे की आय भी मिल रही है और पहचान भी बन रही है।  दो-चार गायों  के साथ पशुपालन का कार्य मैने शुरू किया था।  दुग्ध से आमदनी हुई तो पशुपालन अब डेयरी व्यवसाय का रूप ले चुका है। उन्होंने बताया कि सात साल पहले दुग्ध की रिटेल बिक्री शुरू की थी । इससे 5-7 हजार रूपए का  मुनाफ़ा मिला। मुनाफे को देखते हुए पशुधन की संख्या बढ़ाने पर फोकस किया। दो-चार गाय और खरीदी । इस तरह व्यवसाय चल निकला। उन्होंने बताया कि पहले परम्परागत तौर-तरीके से ही पशुधन का पालन करता रहा।  बाद में वैज्ञानिक ढग़ से पशुओं की आवास और आहार व्यवस्था में जुट गया। गौरतलब है कि किसान किशन गोपाल ने पशु आवास के लिए 30 गुना 70, 35 गुना 90 और बछड़ो के लिए 15 गुना 20 आकार के शैड बनाएं हुए है।  उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों में मक्का, ज्वार का उत्पादन लेता हॅू। यह फसले सूखे पशु चारे के रूप में काम आ जाती है। शेष जमीन पर हरे चारे का उत्पादन लेता हॅू। रबी खरीफ फसलों से सालाना डेढ़ से दो लाख रूपए की आय हो जाती है।

रोजाना 425 लीटर दुग्ध का उत्पादन

उन्होंने बताया कि सात साल की मेहनत का परिणाम है कि पशुधन की संख्या 80 तक पहुंच चुकी है। दुधारू पशुधन में 40 देसी-विदेशी नस्ल की गाय शामिल है। प्रतिदिन 400-425 लीटर दुग्ध का उत्पादन होता है। गाय के दुग्ध की बिक्री रिटेल में 45-50 रूपए प्रति लीटर की दर से कर रहा हॅू।  उन्होंने बताया कि दुग्ध निकालने से उपभोक्ता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी मैं स्वयं देख रहा हॅू। गौरतलब है कि किशन गोपाल ने अपने साथ-साथ तीन व्यक्तियों को रोजगार दिया हुआ है।

अब नस्ल सुधार पर फोकस

उन्होंने बताया कि डेयरी व्यवसाय चल निकलने के बाद अब कृषि विज्ञान केन्द्र, भीलवाड़ा के सहयोग से पशु नस्ल सुधार पर कार्य कर रहा हॅू। ताकि, बाहर से पशुधन की खरीद नहीं करनी पड़े। इसके लिए बछड़ी के जन्म से लेकर व्यस्क होने तक वैज्ञानिक तौर-तरीके से पालन कर रहा हॅू। ताकि, ब्यांत के बाद दुग्ध का अच्छा उत्पादन पशु से मिल सके।

गोबर से भी आय

उन्होंने बताया कि खेतों में काम आने के बाद शेष रहने वाला गोबर भी आमदनी दे रहा है। सालाना लाख से सवा लाख रूपए का गोबर जरूरतमंद किसानों को बिक्री कर देता हॅू। उन्होंने बताया कि पशुओं की चिकित्सा स्वयं देख लेता हॅू। जरूरत होने पर गांव के पशु चिकित्सक से उपचार करवाता हॅू। पशुओं को संतुलित पशु आहार देता हॅू। इससे पशुओं में दुग्ध उत्पादन की दर बनी रहती है।