सब्जी की खेती ने बदली किस्मत, महिला किसान ने कमाए ढाई लाख रुपये
(सभी तस्वीरें- हलधर)
डामोरफला, डूंगरपुर। वैज्ञानिक सलाह पर खेतों की इबादत करना शुरू किया। परिणाम रहा कि पति की खदान की मजदूरी छूट गई और परिवार की आर्थिक खुशहाली बढ़ रही है। सब्जी उत्पादन से परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने वाली यह कृषक महिला है धुली डामोर। जो 5 बीघा जमीन से अब ढ़ाई लाख रूपए की आमदनी ले रही है। किसान धुली ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास 5 बीघा जमीन है। जमीन पर परम्परागत तौर-तरीको से खेती करने से आमदनी कम मिलती थी। इस कारण आर्थिक तंगी भी बनी रहती थी। परिवार का खर्च चलाने के लिए पति को वर्ष भर खदान में मजदूरी करनी पड़ती थी। उन्होंने बताया कि परिवार के आर्थिक हालात केवीके के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन का ही परिणाम है। उन्होंने बताया कि केवीके द्वारा गांव में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम से सब्जी उत्पादन के लिए प्रोत्साहित हुई। वैज्ञानिकों के निरंतर सम्पर्क में रहकर सब्जी फसलों का उत्पादन लेना शुरू किया। एक बीघा क्षेत्र में सब्जी उत्पादन से करीब सवा लाख रूपए की आमदनी मिली। इस स्थिति को देखकर दूसरे साल सब्जी फसल का दायरा बढ़ाया। साथ ही, बचत से ट्यूबवैल भी खुदवाया। उन्होने बताया कि परम्परागत फसलो में गेहंू, ज्वार, उड़द और सरसों की बुवाई करती हॅू। इन फसलों से 50-60 हजार रूपए की आमदनी मिल जाती है।
सब्जी फसलों से अच्छी आय
उन्होंने बताया कि केन्द्र से जुडऩे के बाद सब्जी फसल उत्पादन की शुरूआत एक बीघा क्षेत्र से हुई। वर्तमान में दो बीघा क्षेत्र में मिर्च, तुरई,भिंड़ी, बैंगन, टमाटर, हल्दी, अदरक और धनिया फसल का उत्पादन लेती हॅू। साथ ही, सब्जी फसलों की रिटेल बिक्री करती हॅू। इससे बाजार भाव ज्यादा मिलते है। इससे सालाना डेढ से पौने दो लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है।
उन्नत पशुपालन
उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास एक गाय, बकरी और एक जोड़ी बैल है। दुग्ध परिवार की आवश्यकता पूर्ति मेें काम आ जाता है। वहीं, पशु अपशिष्ट खेतों में काम आ जाता है।
स्टोरी इनपुट: सीएम बलाई, केवीके,डूंगरपुर