बूंद-बूंद की मेहनत ने बदली तकदीर, कमाई पहुंची 8 लाख के पार !

नई दिल्ली 02-Jun-2026 11:56 AM

बूंद-बूंद की मेहनत ने बदली तकदीर, कमाई पहुंची 8 लाख के पार !

(सभी तस्वीरें- हलधर)

बोरूंदा, जोधपुर। हिम्मत और हौंसलें से सूखे को मात देने वाला यह किसान है रामस्वरूप भंवरिया। जो पहले बरसाती फसल तक सीमित रहा। लेकिन, अब संरक्षित खेती से जुड़ चुका है। साथ ही, वार्षिक आमदनी के आंकडे को पांच गुना तक बढ़ा चुके है। अब आप सोच रहे होंगे, ये बदलाव कैसे आया? तो बता दें कि फार्मपौंड के पानी से खेती की यह तस्वीर सामने आई है। इससे कमाई का आंकड़ा 8 लाख रूपए तक पहुंच चुका है। किसान रामस्वरूप  ने हलधर टाइम्स को बताया कि हम तीन भाईयों के मध्य 35 बीघा जमीन है। स्नातक करने के बाद करीब दो साल एक कंपनी में 15 हजार मासिक पर नौकरी की। लेकिन, इससे परिवार का गुजारा चलाना मुश्किल था, पर नौकरी छोडऩा भी मेरे लिए उचित नहीं था। क्योंकि, जमीन बारानी थी। सालभर में लाख से डेढ़ लाख रूपए की आमदनी मिलती थी। इस ऊहापोह के बीच मेरी मुलाकात क्षेत्र के उद्यान विभाग के अधिकारियों से हुई। उनके मार्गदर्शन से वर्ष 2017 में फार्मपौंड खुदवाया और परम्परागत फसलों की खेती करने लगा। उन्होंने बताया कि बरसाती पानी के संग्रहण से खेती में नई रवानी देखने को मिली। क्योंकि, खरीफ के साथ-साथ रबी में जीरा, सरसों, ईसबगोल जैसी फसलो का उत्पादन मिलना शुरू हो गया था। वहीं, खरीफ में मूंग, मोठ, बाजरी का उत्पादन लेता हॅू। इसके चलते वार्षिक आमदनी 5 लाख रूपए तक पहुंच चुकी है। 

अब हाईटेक खेती
उन्होंने बताया कि परम्परागत से सरसब्ज होने के बाद अब आय बढौत्तरी के लिए हाईटेक खेती से जुड़ा हूॅ। 2500 वर्ग मीटर क्षेत्र में पॉली हाउस स्थापित कराया है। जिसमें खीरा की फसल ले रहा हॅू। इससे सालाना तीन लाख रूपए की शुद्ध बचत मिल रही है। 

उन्नत पशुपालन
उन्होने बताया कि पशुधन में मेरे पास 3 गाय और 2 भैंस है। प्रतिदिन 10-12 लीटर दुग्ध का उत्पादन होता है। एक समय के दुग्ध का उपयोग घर में हो जाता है। वहीं, 6 किलो दुग्ध उपभोक्ताओ को 70 रूपए की दर से बिक्री कर देता हॅू। इससे मासिक 15-18 हजार रूपए की आमदनी मिल जाती है। 

स्टोरी इनपुट: रफीक अहमद कुरैशी, पूर्व सहायक कृषि अधिकारी, उघान, पीपाड़शहर-जोधपुर


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