खरबूजा बीज उत्पादन ने बदली किसान मुकेश अहीर की किस्मत
(सभी तस्वीरें- हलधर)
खेड़ारूधा, कोटा। खरबूजे की खेती किसानों को निहाल कर रही है। यह बात हम नहीं, किसान स्वयं स्वीकार कर रहे है। क्योंकि, यह ऐसी फसल है, जिसका बीज भी ऊंचे भाव पर बिक्री होता है। खरबूजा बीज उत्पादन से मुनाफे की बिसात तैयार करने वाले ऐसे ही किसान है मुकेश अहीर। जिन्होंने इस साल 10 क्विंटल बीज तैयार किया है। उनका कहना है कि वर्तमान में बीज के भाव 25 हजार रूपए प्रति क्विंटल चल रहे है। लेकिन, अभी बिक्री करने का मन नहीं है। बीज के वर्तमान भाव के हिसाब से ही देखे तो किसान मुकेश ने सवा दो लाख रूपए का शुद्ध मुनाफा बीज उत्पादन से कमाया है। इससे सकल आय का आंकड़ा बढक़र 13-14 लाख रूपए के करीब पहुंच चुका है। किसान मुकेश ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास 70-80 बीघा जमीन है। इसमें परम्परागत फसलो का उत्पादन लेते आए है। खरबूजा बीज उत्पादन का यह पहला प्रयास है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ सालों से क्षेत्र के किसानों को खरबूजे की खेती से अच्छी आय प्राप्त करते देखा था। इसके चलते इस साल मैने भी एक साल 10 बीघा क्षेत्र में खरबूजा लगाया। साथ ही, बीज तैयार किया। उन्होने बताया कि फिलहाल बीज को बिक्री नहीं किया है। लेकिन, वर्तमान में बीज के भाव 25 हजार रूपए प्रति क्विंटल बोले जा रहे है। बता दें कि किसान सातवीं पास करने के बाद से ही खेती से जुड़े हुए है। उन्होंने बताया कि सिंचाई के लिए मेरे पास कुआं और ट्यूबवैल है। परम्परागत फसलों में धनिया, सरसों, तिल, गेहूं आदि फसलो का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालाना 10-11 लाख रूपए का शुद्ध लाभ मिल जाता है।
संतरे से भी लाखों
उन्होंने बताया कि आय बढाने के लिए दशक पूर्व संतरे की खेती का रूख किया। 7 बीघा जमीन में बगीचा स्थापित किया। बेहत्तर देखरेख के चलते बगीचे से सालाना ढ़ाई से तीन लाख रूपए की आमददनी मिल जाती है। लेकिन, बगीचे से आय का आंकड़े में फलाव के आधार पर उतार-चढ़ावा आता रहता है।
पशुपालन भी लाभकारी
उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास 4 भैंस और 1 गाय है। प्रतिदिन 15-20 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिलता है। लेकिन, मैं दुग्ध की बिक्री नहीं करता हॅू। क्योंकि, परिवार बड़ा है। घरेलू आवश्यकता पूर्ति के बाद शेष रहने वाले दुग्ध से घी तैयार कर लेता हॅॅू। इससे पशुधन का खर्च निकल जाता है। जबकि, पशु अपशिष्ट खाद के रूप में खेतों में काम आ जाता है।
स्टोरी इनपुट: एनबी मालव, उपनिदेशक, उद्यान कोटा।