जर्मनी छोड़ गांव लौटे इंजीनियर, अमरूद से किसानों की आमदनी पांच गुना
(सभी तस्वीरें- हलधर)सवाईमाधोपुर। दिखते नहीं जुगनू आसानी से...। लेकिन, आते है जब नजर अंधेरे दूर हो जाते है। जी हां, ऐसे ही किरदार है सुधांशु गुप्ता। जो पहले जर्मनी में कैमिकल इंजीनियर थे। लेकिन, अब अमरूद सहित उन किसानों के लिए मसीहा बनकर सामने आए है, जो किसान प्रसंस्करण से अपनी आय बढाने चाहते है। गौरतलब है कि सुधांशु ने जर्मनी से लौटकर ना केवल अपने हाथों से कम लागत वाली मूवेबल प्रसंस्करण यूनिट तैयार की है। साथ ही, अमरूद से प्रसंस्कृत उत्पाद भी तैयार कर रहे है। इससे सवाई माधोपुर जिले के किसानों को एक नई उम्मीद की किरण नजर आई है। अमरूद प्रसंस्करण से जुड़े सुधांशु गुप्ता ने हलधर टाइम्स को बताया कि आईआईटी करने के बाद कई साल जर्मनी में यूएस बेस्ड़ कंपनी में काम किया। वर्ष 2016 में सवाईमाधोपुर लौटा और किसानों के लिए कुछ नया करने का विचार आया। क्योंकि, मेरे मामाजी के यहां अमरूद का उत्पादन होता था। लेकिन, बाजार में सी और डी ग्रेड़ अमरूद को औने-पौने दाम में बेचना पड़ता था। यह समस्या जिले के हर किसान के साथ थी। इस स्थिति को देखते हुए अमरूद प्रोसेसिंग मशीन डिजाइन की और अपने इरादों को मंजिल देने में सफल भी रहा। उन्होंने बताया कि मूवेबल प्रोसेसिंग यूनिट तैयार होने से मुझे अपना कारोबार मिला। वहीं, किसानों को अपनी उपज का बेहत्तर मूल्य। अमरूद प्रसंस्करण यूनिट स्थापित होने से किसान भी खुश है और मेरा भी कारोबार चल रहा है।
अब तक 16 यूनिट स्थापित
उन्होंने बताया कि तैयार मशीन की अब तक देश में 16 यूनिट स्थापित हो चुकी है। यह यूनिट प्रदेश सहित पंजाब, हरियाणा, लेह-लद्दाख सहित दूसरे राज्यों में स्थापित हुई है। उन्होंने बताया कि तैयार मशीन पर सरकार द्वारा अनुदान देय है। इसके चलते एकल किसान, किसान समूह अथवा एफपीओ मशीन को स्थापित करके फू ड प्रोसेसिंग का काम शुरू कर सकते है। गौरतल है कि इस मशीन को तैयार करने में 40-45 लाख रूपए की लागत आई है।
कई प्रसंस्कृत उत्पाद तैयार
उन्होने बताया कि सवाईमाधोपुर यूनिट में अमरूद के कई प्रसंस्कृत उत्पाद तैयार किए जा रहे है। जबकि, तैयार मशीन से अधिकांश फलों से प्रसंस्कृत उत्पाद तैयार किए जा सकते है। उन्होंने बताया कि अमरूद से पल्प निकाला जाता है। इसके बाद सालभर उत्पाद तैयार किए जा सकते है।