BCA होल्डर ने कंप्यूटर छोड़ी चुनी खेती, बीजोत्पादन से मुनाफा 5 लाख पार!

नई दिल्ली 20-May-2026 12:22 PM

BCA होल्डर ने कंप्यूटर छोड़ी चुनी खेती, बीजोत्पादन से मुनाफा 5 लाख पार!

(सभी तस्वीरें- हलधर)

बलकासा, बूंदी। खेती को लाभकारी कैसे बनाया जा जाएं? यही यक्ष प्रश्न प्रत्येक खेतीहर के सामने है। लेकिन, आय बढाने के लिए किसानों को ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है। किसान रितुराज शर्मा के जैसे परम्परागत फसलों की उन्नत किस्मों का बीजोत्पादन कर लिया जाएं तो भी आय को चार चांद लगाये जा सक ते है। गौरतलब है कि किसान रितुराज चना और धान फसल का बीजोत्पादन करके अपनी आमदनी को 5 लाख रूपए तक बढ़ा चुका है। किसान रितुराज ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास 45 बीघा जमीन है। परिवार के आर्थिक हालात सामान्य होने के चलते बीसीए करने के बाद स्वयं का काम करना शुरू कर दिया। साथ ही, खेती का काम भी देखने लगा। उन्होंने बताया कि खेती की जिम्मेदारी संभालने के दौरान फसली सीजन में उन्नत बीजों की पूछ-परख भारी पड़ती थी। इस स्थिति को देखते हुए स्वयं अपने लिए बीज पैदा करने का मन बनाया। पहले तो किसी संस्था से जुडक़र बीज उत्पादन करना शुरू किया। लेकिन, बीज में खोट के चलते अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई। यह बात जब मैने अपने एक रिश्तेदार के सामने रखी तो उन्होंने मुझे कृषि विज्ञान के न्द्र, बूंदी से जुडऩे की सलाह दी। उन्होंने बताया कि केवीके से जुडऩे के बाद वैज्ञानिक तौर-तरीके से परम्परागत फसलों के बीजोत्पादन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। साथ ही, अर्जित ज्ञान का धरातल देना शुरू किया। परिणाम रहा कि दो साल के भीतर की आय का आंकड़ा 5 लाख रूपए के करीब बढ़ चुका है। उन्होंने बताया कि फसलों से लाभ कमाने के लिए जैविक खाद का ज्यादा प्रयोग करता हॅू। जब रोग-कीट का प्रकोप ईटीएल स्तर से ज्यादा हो जाता है, तब ही रासायनिक दवा उपयोग में लेता हॅू। 

चना और धान पर फोकस
उन्होने बताया कि कृषि विज्ञान केन्द्र से पिछले दो साल से चना और धान की बीजोत्पादन कार्यक्रम ले रहा हॅू। इससे मार्केट की टेंशन भी नहीं है। समय-समय पर कृषि वैज्ञानिक बीज प्रक्षेत्र का भ्रमण करते है। इससे वैज्ञानिक मार्गदर्शन भी मिल जाता है और क्वालिटी सीड़ भी तैयार हो जाता है। बता दें कि किसान रितुराज चना किस्म जीएनजी-2144 और बासमती धान किस्म 1509, 1692 और 1718 का उत्पादन ले रहे है। 

यह मिली पैदावार
उन्होने बताया कि इस साल ज्यादा बारिश के बावजूद भी चने की पैदावार 5 क्विंटल प्रति बीघा रही है। वहीं, धान का उत्पादन 8-9 क्विंटल प्रति बीघा रहा है। उन्होंने बताया कि पहले फसल उत्पादन से सालाना 7 लाख रूपए की आमदनी मिलती थी। जो बीजोत्पादन से बढक़र 12 लाख रूपए तक पहुंच चुकी है। 

स्टोरी इनपुट: डॉ.एस.राम रूंडला, डॉ. एमके मीना, डॉ. महेश चौधरी, डॉ. जीएस मीना, केवीके, बूंदी


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