गोबर से 35 लाख की कमाई! किसान का कमाल स्टार्टअप
(सभी तस्वीरें- हलधर)धनेरिया, उदयपुर। सब्जी उत्पादन में घाटा खाने के बाद गोबर से कृषि स्टार्टअप धरातल देने वाले एंटरप्रेन्योर है हितेश शर्मा। जिन्होंने पहले सब्जी उत्पादन में बेहत्तर आय की झलक देखी। एक साथ 20 बीघा क्षेत्र में सब्जी फसल की बुवाई कर दी। लेकिन, बाजार की मार से लागत निकालना भी मुश्किल हो गया। यही से हितेश को किसान की पीड़ा समझ आई और लागत घटाने के लिए यूरिया-डीएपी का विकल्प तैयार कर दिया। यानी गोबर से बायो उत्पाद, जिसकी खेती में मात्रा तो अधिक लगती है। लेकिन, भूमि स्वस्थ होने के साथ-साथ लागत घटती है। हितेश ने हलधर टाइम्स को बताया कि पहले एक निजी बैंक में 8 साल काम किया। इसके बाद स्वयं की फाइनेंस कंपनी खोल ली। वर्ष 2023 तक यह कंपनी चलाई। इसके बाद किसान बनने की धुन सवार हो गई। 20 बीघा जमीन लीज पर लेकर एक साथ पूरी जमीन में सब्जी फसल की बुवाई करवा दी। उत्पादन भी आया। लेकिन, बाजार मार गया। अच्छा खासा घाटा लगा। इसके बाद परम्परागत फसलों का उत्पादन लेना शुरू किया। इस दौरान खाद लेने के लिए लाइन में लगना पड़ा। यही से किसान की पीड़ा समझ में आई। इसके बाद एमपीयूएटी के वैज्ञानिकों से सम्पर्क किया और किसानों के लिए कुछ करने की इच्छा उनके सामने रखी। यही से मेरे स्टार्टअप का जन्म हुआ। उन्होंने बताया कि अब गोबर से कई तरह से बायो उत्पाद तैयार कर रहा हॅू। जो खाद्यान्न के साथ-साथ फल-सब्जी फसलों के लिए लाभदायक है।

उन्होंने बताया कि मेरे स्टार्टअप से क्षेत्र की गौशालाओं को भी लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि जिले की 25 गौशालाओं से गोबर की खरीद करता हॅू। सालाना 1300 टन गोबर की जरूरत मुझे होती है। इसके बाद गौशालाओं को 30-35 लाख रूपए का भुगतान कर रहा हूूॅ। उन्होंने बताया कि एक गौशाला की 80 गायों को तो मैने जमीन दी है। इससे गायों को चारा-पानी मिल जाता है, इसके बदले मुझे खाद तैयार करने केलिए गोबर मिल जाता है।
उन्होंने बताया कि मैदान में बायो उत्पाद के परिणाम सकारात्मक रहने के बाद आधुनिक प्रयोगशाला स्थापित की है। जिसमें रिटायर्ड मृदा वैज्ञानिक काम कर रहे है। इससे बायो उत्पाद को पाउडर और तरल रूप में भी तैयार करना संभव हो रहा है। उत्पाद की मार्केटिंग का जिम्मा मैं देख रहा हॅू।
स्टोरी इनपुट: डॉ. दीपक कुमार जैन, केवीके, बडग़ांव , उदयपुर