किसान बना लखपति पपीता से 6 गुना आय बढ़ी

नई दिल्ली 27-Apr-2026 02:00 PM

किसान बना लखपति पपीता से 6 गुना आय बढ़ी

(सभी तस्वीरें- हलधर)

डबोक, उदयपुर। पपीता का एक पेड़ किसान को हजार से ज्यादा की आय दे सकता है। बशर्ते, पपीता के बगीचे की देखरेख अच्छी की जाए। पपीता के एक पेड़ से हजार की आय लेने वाला यह किसान है गिरिश जाट। जिसने अपनी आय को 6 गुना तक बढ़ाने में कामयाबी हासिल की है। उनका कहना है कि पहले परम्परागत फसलों से सालाना 3 लाख रूपए की आय मिलती थी। लेकिन, अब इससे 6 गुना आय एक हैक्टयर क्षेत्र से मिल रही है। किसान गिरीश ने हलधर टाइम्स को बताया कि मेरे पास 35 बीघा जमीन है। 10वीं पास करने के बाद से खेती से जुड़ा हुआ हॅू। उन्होने बताया कि करीब 5-6 साल पहले कृषि विज्ञान केन्द्र से फल उत्पादन तकनीक का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसी प्रशिक्षण के दौरान पपीता खेती के बारे में जानने-समझने को मिला। यही से पपीता उपजाने की धुन सवार हुई और अब परिणाम सबके सामने है। इसकी खेती ने परिवार के आर्थिक चक्र को बदल कर रख दिया है। यकीन ही नहीं होता कि खेतों से इतनी आय भी संभव है। गौरतलब है कि किसान एक हैक्टयर क्षेत्र में पपीता की खेती कर रहे है। उन्होने बताया कि सिंचाई के लिए मेरे पास कुआं है और ड्रिप-मल्चिंग का उपयोग करते हुए पपीता की खेती कर रहा हॅू। परम्परागत फसलों में गेहूं, चना, सरसों, मक्का और सोयाबीन का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से खर्च निकालने के बाद 2 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। 

कुल तीन हैक्टयर में खेती

उन्होने बताया कि एक हैक्टयर क्षेत्र में पपीता का पुराना बगीचा स्थापित है। वहीं, ढ़ाई महीने पहले 2 हैक्टयर क्षेत्र में पपीता का नया बगीचा स्थापित किया है। क्योंकि, इस फसल में लागत कम, मुनाफा ज्यादा है। उन्होने बताया कि एक हैक्टयर क्षेत्र से करीब 12 लाख रूपए का शुद्ध मुनाफा मिल जाता है। 

किचन गार्डन

उन्होने बताया कि केवीके के प्रोत्साहन से किचन गार्डन भी स्थापित किया हुआ है। जिसमें घरेलू आवश्यकता पूर्ति के लिए सब्जी फसलो का उत्पादन ले रहा हॅू। 

उन्नत पशुपालन

उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास 4 भैंस और दो गाय है। प्रतिदिन 12-15 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिलता है। दुग्ध ज्यादा होने से बिक्री कर देता हॅू। अन्यथा घरेलू आवश्यकता पूर्ति के बाद शेष रहने वाले दुग्ध से घी तैयार कर लेता हॅूू। इससे पशुधन का खर्च निकल जाता है। वहीं, पशु अपशिष्ट का उपयोग वर्मी कम्पोस्ट बनाने में कर रहा हॅू। 

स्टोरी इनपुट: डॉ. दीपक जैन, डॉ. मनप्रीत सिंह, केवीके,बडग़ांव, उदयपुर


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