किसान ने वैज्ञानिक सलाह से बदला खेती का स्वरूप, कमाई पहुंची 18 लाख के पार

नई दिल्ली 10-Mar-2026 01:00 PM

किसान ने वैज्ञानिक सलाह से बदला खेती का स्वरूप, कमाई पहुंची 18 लाख के पार

(सभी तस्वीरें- हलधर)

सारणों का खेड़ा, भीलवाड़ा। खेती से शोहरत हासिल करने वाले लोग विरले ही होते है। ऐसे ही मेहनतकश किसान है रामप्रसाद जाट। जिन्होंने अपनी सूझबूझ से आय को चार गुना किया है। अब आपके मन में प्रश्र उठ रहा होगा कि यह कैसे संभव हुआ। इसका जबाव है, अनार की खेती। किसान रामप्रसाद का कहना है कि अनार की खेती से सालाना 10-12 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। जबकि, सकल आय का आंकड़ा 17-18 लाख रूपए के करीब है।  वहीं, परम्परागत फसलों से भी अच्छी आय मिलने लगी है। किसान रामप्रसाद ने हलधर टाइम्स को बताया कि 8वीं पास करने के बाद से खेती कर रहा हॅू। परिवार के मध्य 60-70 बीघा जमीन है। उन्होंने बताया कि पहले परम्परागत फसलो का उत्पादन लेता रहा। लेकिन, बारानी कृषि अनुसंधान केन्द्र, आरजिया से जुडऩे के बाद खेती मेें कुछ नया करने का हौंसला मिला और खेतों में भगवा ने रंग जमा लिया। उन्होंने बताया कि 15 बीघा जमीन में अनार की खेती कर रहा हूॅ। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में अनार की खेती से कम ही किसान जुड़े हुए है। इस कारण भाव भी अच्छे मिलते है। उन्होंने बताया कि सिंचाई के लिए मेरे पास कुआं है और बगीचे में जल बचत के लिए बूंद-बूंद सिंचाई का उपयोग कर रहा हॅू। परम्परागत फसलों में गेहूं, सरसों, लहसुन, मक्का का उत्पदन लेता हॅॅू। इन फसलो से भी सालाना 4-5 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। 

15 बीघा में भगवा

उन्होंने बताया कि क्षेत्र के कुछ किसान ही अनार की खेती से जुड़े हुए है। कृषि वैज्ञानिकों से प्रोत्साहन पाकर मैने भी 15 बीघा जमीन में अनार की बगीचा स्थापित किया। उन्होंने बताया कि दशक पूर्व शुरू की गई बागवानी से अच्छा लाभ मिला। इसने परिवार की आर्थिक तस्वीर बदलने का काम किया। उन्होने बताया कि पुराना बगीचा पिछले साल उखाड़ दिया है। लेकिन, 4 साल के बगीचे से उत्पादन मिल रहा है। इससे 10-12 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। वहीं, एक बगीचा वर्तमान में एक साल का हुआ है। 

पशुपालन से आय

पशुधन में मेरे पास 7 भैंस और 6 गाय है। वैज्ञानिक तरीके से पशु आवास तैयार किया हुआ है। पशु आहार भी मानक स्तर का ही खरीद रहा हॅू। इससे प्रतिदिन 22-25 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल रहा है। उन्होने बताया कि करीब 20 लीटर दुग्ध डेयरी को 55-60 रूपए प्रति लीटर की दर से बिक्री कर देता हॅू। इससे भी आय बढाने में मदद मिल रही है। उन्होने बताया कि गोबर का उपयोग खेतों में कर रहा हॅू। 

स्टोरी इनपुट: डॉ. केसी नागर, मंयक गोयल,हिमांशु कु लदीप, डॉ. एलके छाता, बारानी कृषि अनुसंधान केन्द्र भीलवाड़


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