ट्रक ड्राइवर से किसान बने, बेर से लाखों कमाए

नई दिल्ली 12-Feb-2026 11:57 AM

ट्रक ड्राइवर से किसान बने, बेर से लाखों कमाए

(सभी तस्वीरें- हलधर)

स्ट्रेयरिंग छोड़ कांटो से दोस्ती, कमाई बढक़र 4 लाख

भानपुरा, जयपुर। ...कांटो से दोस्ती कर ली। जी हां, कांटो से प्यार करके सफलता की कुछ ऐसी ही पटकथा लिखी है किसान भंवरलाल जाट ने। जिन्होंने दो जूण की फ्रिक में करीब दो दशक तक ट्रक चलाया। लेकिन, अब बेर की बागवानी से सालाना ढ़ाई लाख रूपए की आय ले रहे हे। जबकि, सकल आय का आंकड़ा 5 लाख रूपए के करीब है। किसान भंवरलाल ने हलधर टाइम्स को बताया कि 10वीं पास करने के साथ ही पढ़ाई छोड़ दी। समय के साथ जिम्मेदारी बड़ी तो रोजी-रोटी के लिए ट्रक चलाना शुरू कर दिया। करीब दो दशक तक यह काम किया। इसके बदले 16 हजार रूपए तनख्वा मिलती थी। उन्होंने बताया कि इस दौरान परिवार के सदस्य खेती-बाड़ी की जिम्मेदारी संभालते रहे। लेकिन, वर्ष 2020 में ड्राइवरी का काम छोडक़र गांव लौट आया और कांटो से दोस्ती कर ली। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में भू-जल स्तर गहरा है। इस कारण कम पानी में बेहत्तर पैदावार देने वाली फसल के बारे में पता किया तो बेर का नाम सामने आया। इसके बाद एक हैक्टयर क्षेत्र में थाई बेर का बगीचा स्थापित किया। उन्होंने बताया कि तीन साल बाद उत्पादन मिलना शुरू हुआ तो आय बढने की उम्मीद बंधी। वर्तमान में बेर का उत्पादन जारी है। जबकि, पिछले साल बेर से शुद्ध ढ़ाई लाख रूपए की आमदनी मिली थी। उन्होंने बताया कि सिंचाई के लिए मेरे पास कुआं है। 

परम्परागत फसल से भी लाभ

उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों में गेहूं, सरसों, मूंगफली, बाजरा का उत्पादन लेता हॅू। उन्होंने बताया कि अब खेती को देखकर लगता है कि दो दशक पहले ही खेती से जुड़ जाता तो परिवार की आर्थिक स्थिति में अब तक काफी बदलाव आ जाता। 

दुग्ध से भी आय

उन्होने बताया कि पशुपालन में मेरे पास दो भैंस है। प्रतिदिन 10 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल रहा है। इसमें से एक समय का दुग्ध डेयरी को 50-55 रूपए प्रति लीटर की दर से बिक्री कर देता हॅू। इससे मासिक 5-6 हजार रूपए की बचत मिल जाती है। वहीं, पशु अपशिष्ट से केंचुआ खाद बना रहा हॅू।


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कहते है कि परिवार के आर्थिक हालात ठीक नही हो तो सफलता के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। किसान औंकारमल मेघवाल के साथ भी यही हुआ है। औंकार ने बताया कि पहले खेतों से पैदावार कम मिलती थी। इससे परिवार का खर्च निकालना भी मुश्किल लगता था। मजबूरी में रोटी-रोटी की तलाश ने मुझे दुबई पहुंचा दिया। आठ साल में जो कमाया, यहां लौटकर खेतों में निवेश किया। इसी का परिणाम है कि अब खेतों से 10-12 लाख रूपए सालाना की आमदनी मिल रही है। गौरतलब है कि किसान औकारमल डेढ़ दशक से सब्जी फसलो की खेती कर रहे है। साथ ही, इन्होने प्रति बीघा परम्परागत फसलों का उत्पादन बढ़ाने में भी सफलता पाई है। मोबाइल 9983231901