अनार पट्टी होने लगी बीमार, भविष्य संकट में

नई दिल्ली 23-Dec-2025 01:25 PM

अनार पट्टी होने लगी बीमार, भविष्य संकट में

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। थार में अ से अनार का ककहरा लिखने वाले किसान अब आ से आजिज नजर आ रहे है। क्योंकि, बगीचों की सघनता बढने से रोग-कीट का प्रसार तेजी से हो रहा है। इससे कीटनाशी की खपत को भी बढावा मिल रहा है। वहीं, किसानों की आर्थिकी और फल गुणवत्ता पर भी विपरीत प्रभाव प्ड़ रहा है। किसानों का कहना है कि पिछले कुछ सालों से फसल में रोग-कीट की अधिकता बढ़ी है। निर्यात योग्य फसल तैयार करने के लिए किसानों को जोर जैव कीटनाशी पर ज्यादा रहता है। लेकिन, कीट-रोग के ज्यादा प्रकोप ने किसानों को रासायनिक कीटनाशी का उपयोग करने को मजबूर कर दिया है। इससे अनार पट्टी का भविष्य खतरे में नजर आने लगा है। गौरतलब है कि प्रदेश में बाड़मेर, बालोतरा, जालौर, सिरोही, जैसलमेर, जोधपुर, पाली, नागौर आदि जिलों में अनार की खेती हो रही है। एक हैक्टयर क्षेत्र से तीन साल बाद लाखों में आमदनी मिलने से पश्चिमी राजस्थान के किसानों को रूझान तेजी से इस फसल की ओर बढ़ा है। लेकिन, कीट-रोग का बढ़ता प्रकोप भविष्य के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में अनार की खेती का रकबा कम होने के पीछे मुख्य कारण कीट-रोग की अधिकता ही रही थी।

बारिश का बदलता पैटर्न

जागसा के किसान कल्लाराम चौधरी ने बताया कि बारिश का बदलता पैटर्न भी अनार फसल को प्रभावित कर रहा है। उन्होनें बताया कि जिस साल ज्यादा बारिश होती है, बगीचों में रोग-कीट की अधिकता ज्यादा रहती है। पौधों में लट और टिकड़ी रोग का प्रकोप ज्यादा होता है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष टिकड़ी रोग के प्रकोप से फसल में 60 फीसदी तक नुकसान दर्ज हुआ था। कृषि वैज्ञानिकों की माने तो पिछले दो तीन साल से फसल में  सर्कोस्पोरा रोग और सर्वाहारी पत्ती लपेटक का प्रकोप ज्यादा पाया गया है।

ऐसे समझे नुकसान

सर्कोस्पोरा रोग:  इस रोग से अनार की पत्तियों और फलों पर हल्के भूरे रंग के धब्बे बनते है। जो बाद में बड़े होकर काले धब्बे बनाते हैं। टहनियों पर काले अण्डाकार धब्बे दिखाई देते हैं। इससे फल की गुणवत्ता प्रभावित होती है। सर्वाहारी पत्ती लपेटक : इसका लार्वा फलों की सतह पर मौजूद खांचों को तोडक़र फलों में प्रवेश करता है। फलों में सुरंग बनाता है। इससे फल सड़ जाता है।

खेत से खेत की दूरी कम

उन्होंने बताया कि 6 साल पहले तक अनार का उत्पादन सीमित था। पर, अब स्थिति बदल चुकी है। पहले 9 से 10 किलोमीटर एरिया में एक से दो अनार के बगीचे थे। लेकिन, एक से दूसरे खेत में अनार का उत्पादन हो रहा है। इससे कीट-रोग का प्रसार तेजी से हो रहा है।


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