हायब्रिड गेंदा खेती में स्टेम रॉट बना किसानों की बड़ी चुनौती

नई दिल्ली 25-Dec-2025 03:24 PM

हायब्रिड गेंदा खेती में स्टेम रॉट बना किसानों की बड़ी चुनौती

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। संकर गेंदा का उत्पादन किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। लेकिन, संकर किस्मों में स्टेम रॉट (तनागलन) का प्रकोप ज्यादा होता है। इस कारण किसानों को उपज के साथ-साथ आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों की माने तो समय पर रोग का नियंत्रण नहीं किया जाएं तो पूरा खेत रोग की चपेट में आ जाता है। इस स्थिति में फसल नष्ट करने के अलावा कोई विकल्प शेष नहीं रहता है। किसानों का कहना है कि देसी गेंदा किस्मों में इस रोग का प्रकोप कम देखने को मिलता है। हालांकि, इस मामले में किसानों और उद्यानिकी वैज्ञानिकों की अलग-अलग राय सामने आई है। लेकिन, फिलहाल स्टेम रॉट की समस्या किसानों की चिंता बढ़ा रही है। गौरतलब है कि गेंदा फसल से किसानों को रबी में अच्छी आय मिलती है। बासंखो के किसान रामनारायण मीणा ने बताया कि कम जमीन, कम पानी में गेंदा फसल को कोई मुकाबला नहीं है। लेकिन, पिछले कुछ सालों से हायब्रिड़ किस्मों में तनागलन की बीमारी ज्यादा दर्ज हो रही है। उन्होने बताया कि पहले मैं देसी गेंदा किस्मों की खेती करता था। लेकिन, उनमें ज्यादा कीट-रोग का प्रकोप नहीं होता था। हाईब्रिड़ गेंदा किस्मों को लेकर कमोबेश यही कहानी किसान अजय मीणा, शंकरलाल मीणा और गंगाराम मीणा ने बताई है।

रिसर्च हो तो मिले लाभ

गौरतलब है कि बासंखो क्षेत्र श्रीकर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर के अन्तर्गत आता है। लेकिन, पुष्प किस्मों पर यहां कभी शोध कार्य नहीं हुआ। शायद यही कारण है कि किसान हायब्रिड़ गेंदा किस्मों का दूसरे राज्य से बीज मंगवा रहे है। यह किस्में कौन-कौनसे रोग-कीट के  प्रति प्रतिरोधकता रखती है, इस बारे में किसानों को कोई जानकारी नहीं है। गौरतलब है कि विश्वविद्यालय में उद्यानिकी का अलग विभाग है। इसके बावजूद गेंदा सहित दूसरी पुष्प किस्मों पर रिसर्च नहीं होना किसानों के लिए अभिशाप साबित हो रहा है।

कैसे फैलता है रोग

गेंदे के फूलों में कॉलर रॉट एक विनाशकारी फफूंद रोग है, जो अक्सर फाइटोफ्थोरा, पाइथियम अथा राइजोक्टोनिया के कारण होता है। यह रोग तने के आधार (कॉलर) पर, मिट्टी की सतह के पास हमला करता है, जिससे काले धब्बे, गूदेदार सडऩ, मुरझाना और अंतत: पौधे की मृत्यु हो जाती है। यह रोग अक्सर अत्यधिक नमी अथवा चोट के कारण शुरू होता है।

रोग एक कारण अनेक

राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा के वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप सिंह शेखावत ने बताया कि स्टेम रॉट रोग प्रकोप के पीछे कई कारण होते है। फसल में यह रोग कि स कारक के चलते फैल रहा है यह तो नमूने की जांच से ही पता चल पायेगा। लेकिन, फाइटोफ्थोरा, पाइथियम, बोट्राइटिस सिनेरिया (ग्रे मोल्ड), अल्टरनेरिया फंफूद इसके जिम्मेदार कारक माने जा सकते है।

यह करें किसान

उन्होंने बताया कि ज्यादा ह्यूमेडिटी की स्थिति में रोग तेजी से प्रसार करता है। भीतरी तापमान का ज्यादा रहना भी एक कारण है। रोग नियंत्रण के लिए सिंचाई को नियंत्रित करें। साथ ही, कार्बेण्डाजिम 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर रोगग्रसित पौधें में ड्रेचिंग करें।

यह कहना सही नहीं है कि हायब्रिड़ गेंदा किस्मों में स्टेम रॉट का प्रकोप ज्यादा होता है। वहीं, देसी किस्में रोग प्रतिरोधी है। यह शोध का विषय है। फसल में इस रोग के पीछे मुख्य कारण ज्यादा नमी और तापमान में बढौत्तरी होती है।

डॉ. एनएल महावर, उद्यानिकी वैज्ञानिक, एमपीयूएटी, उदयपुर


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