इधर कुआं उधर खाई जैसी स्थिति से जूझ रहे किसान
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। गेहूं उत्पादक किसानों को भी इधर कुआं, इधर खाई जैसी स्थिति से दो चार होना पड़ रहा है। ऐसे में बाजार में गेहंू की आवक कमजोर पडऩे लगी है। गौरतलब है कि बंपर आवक के चलते प्रदेश की अधिकांश मंडियों में गेहूं के भाव में 200-300 रूपए प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज हुई है। इस कारण बाजार में गेहूं की बिक्री करने वाले किसानो को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालात यह है कि गेहूं के भाव घोषित एमएसपी से नीचे पहुंंच गए है। वहीं, सरकारी खरीद की सुस्त चाल किसानों पर भारी पड़ती नजर आ रही है। गौरतलब है कि प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा घोषित 150 रूपए बोनस के बाद गेहूं उत्पादकों को 2735 रूपए प्रति क्विंटल के भाव मिल रहे है। लेकिन, इस भाव का लाभ एमएसपी पर बिक्री करने के वाले किसानों को मिल रहा है। बाजार के जानकारों का कहना है कि सरकारी खरीद शुरू होने से पूर्व बाजार में गेहूं के दाम घोषित एमएसपी 2585 रू पए से ज्यादा बोले जा रहे थे। लेकिन, इन दिनों मंडियों में गेहूं 2300-2400 रूपए प्रति क्विं टल के भाव से खरीद हो रहा है। ऐसे में किसानों को प्रति क्विं टल 200-300 रूपए से ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। गौरतलब है कि प्रदेश में 31 मई तक गेहूं की खरीद होनी है। ऐसे में अब किसान के पास गेहूं को सरकारी कांटे पर तुलवाने या फिर भंड़ारित करके रखने का विकल्प शेष रहा है। क्योंकि, बाजार में मौजूदा भाव पर गेहूं की बिक्री करना किसानों के लिए अपने पैरो पर कुल्हाड़ी मारने से कम नहीं है। मंड़ी कारोबारियो की माने तो यह स्थिति राजस्थान की नहीं, दूसरे गेहूं उत्पादक राज्यों में भी देखने को मिल रही है।
कीमतें स्थिर रहने का अनुमान
गेहूं व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि आने वाले कुछ हफ्तों में मंडियों में गेहूं की आवक और ज्यादा बढऩे की उम्मीद है, जिसके चलते चालू सीजन में कीमतें अब एमएसपी के आसपास ही रहने का अनुमान है, इनमें और बढ़ोतरी नहीं होगी। गौरतलब है कि इस साल सरकार ने गेहूं का एमएसपी 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। वहीं, एमएसपी पर राज्य सरकार प्रति क्विंटल 150 रूपए बोनस किसानों को दे रही है। इस तरह गेहूं की सरकारी खरीद 2735 रूपए की दर से किसानों से की जा रही है।
15.30 लाख टन गेहूं ही खरीद
मौजूदा 2026-27 रबी मार्केटिंग सीजन में गेहूं खरीद की शुरुआत ही सुस्त नजर आ रही है। फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के आंकड़े के मुताबिक अब तक सरकार महज 15.30 लाख टन गेहूं ही खरीद पाई है, जो पिछले साल के इसी समय के मुकाबले करीब 69 फीसदी कम है। जबकि, मंडियों में कुल आवक 34.74 लाख टन दर्ज की गई है। बता दें कि 2025-26 के इसी दौर में 50.08 लाख टन गेहूं खरीदा गया था और मंडियों में आवक 92.72 लाख टन तक पहुंच गई थी।
8 लाख एमटी की खरीद
प्रदेश में अब तक 8,957 टन गेहूं की खरीद हुई है। जबकि लक्ष्य 30 लाख एमटी के आस-पास है। कमोबेश यही स्थिति प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में भी देखने को मिल रही है। पंजाब में सिर्फ 29,925 टन, हरियाणा में 11.23 लाख टन, उत्तर प्रदेश में 96,670 टन, मध्य प्रदेश में 1.02 लाख टन, और उत्तराखंड में 1.66 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है। गौरतलब है कि सरकार ने इस सीजन के लिए 30.3 लाख टन खरीद का लक्ष्य तय किया है। लेकिन मौजूदा रफ्तार को देखते हुए यह लक्ष्य चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है।
जयपुर। गेहूं उत्पादक किसानों को भी इधर कुआं, इधर खाई जैसी स्थिति से दो चार होना पड़ रहा है। ऐसे में बाजार में गेहूँ की आवक कमजोर पड़ने लगी है। गौरतलब है कि बंपर आवक के चलते प्रदेश की अधिकांश मंडियों में गेहूं के भाव में 200-300 रूपए प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज हुई है। इस कारण बाजार में गेहूं की बिक्री करने वाले किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालात यह है कि गेहूं के भाव घोषित एमएसपी से नीचे पहुंंच गए है। वहीं, सरकारी खरीद की सुस्त चाल किसानों पर भारी पड़ती नजर आ रही है। गौरतलब है कि प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा घोषित 150 रूपए बोनस के बाद गेहूं उत्पादकों को 2735 रूपए प्रति क्विंटल के भाव मिल रहे है। लेकिन, इस भाव का लाभ एमएसपी पर बिक्री करने के वाले किसानों को मिल रहा है। बाजार के जानकारों का कहना है कि सरकारी खरीद शुरू होने से पूर्व बाजार में गेहूं के दाम घोषित एमएसपी 2585 रू पए से ज्यादा बोले जा रहे थे। लेकिन, इन दिनों मंडियों में गेहूं 2300-2400 रूपए प्रति क्विं टल के भाव से खरीद हो रहा है। ऐसे में किसानों को प्रति क्विंटल 200-300 रुपये से ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। गौरतलब है कि प्रदेश में 31 मई तक गेहूं की खरीद होनी है। ऐसे में अब किसान के पास गेहंू को सरकारी कांटे पर तुलवाने या फिर भंड़ारित करके रखने का विकल्प शेष रहा है। क्योंकि, बाजार में मौजूदा भाव पर गेहूं की बिक्री करना किसानों के लिए अपने पैरो पर कुल्हाड़ी मारने से कम नहीं है। मंड़ी कारोबारियो की माने तो यह स्थिति राजस्थान की नहीं, दूसरे गेहूं उत्पादक राज्यों में भी देखने को मिल रही है।
कीमतें स्थिर रहने का अनुमान
गेहूं व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि आने वाले कुछ हफ्तों में मंडियों में गेहूं की आवक और ज्यादा बढऩे की उम्मीद है, जिसके चलते चालू सीजन में कीमतें अब एमएसपी के आसपास ही रहने का अनुमान है, इनमें और बढ़ोतरी नहीं होगी। गौरतलब है कि इस साल सरकार ने गेहूं का एमएसपी 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। वहीं, एमएसपी पर राज्य सरकार प्रति क्विंटल 150 रुपये बोनस किसानों को दे रही है। इस तरह गेहूँ की सरकारी खरीद 2735 रुपये की दर से किसानों से की जा रही है।
15.30 लाख टन गेहूं ही खरीद
मौजूदा 2026-27 रबी मार्केटिंग सीजन में गेहूं खरीद की शुरुआत ही सुस्त नजर आ रही है। फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के आंकड़े के मुताबिक अब तक सरकार महज 15.30 लाख टन गेहूं ही खरीद पाई है, जो पिछले साल के इसी समय के मुकाबले करीब 69 फीसदी कम है। जबकि, मंडियों में कुल आवक 34.74 लाख टन दर्ज की गई है। बता दें कि 2025-26 के इसी दौर में 50.08 लाख टन गेहूं खरीदा गया था और मंडियों में आवक 92.72 लाख टन तक पहुंच गई थी।
8 लाख एमटी की खरीद
प्रदेश में अब तक 8,957 टन गेहूं की खरीद हुई है। जबकि, लक्ष्य 30 लाख एमटी के आस-पास है। कमोबेश यही स्थिति प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में भी देखने को मिल रही है। पंजाब में सिर्फ 29,925 टन, हरियाणा में 11.23 लाख टन, उत्तर प्रदेश में 96,670 टन, मध्य प्रदेश में 1.02 लाख टन, और उत्तराखंड में 1.66 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है। गौरतलब है कि सरकार ने इस सीजन के लिए 30.3 लाख टन खरीद का लक्ष्य तय किया है। लेकिन मौजूदा रफ्तार को देखते हुए यह लक्ष्य चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है।