किसानों को राहत, ओले-बारिश से नहीं खराब हुई तिनके भर की फसल!

नई दिल्ली 13-Apr-2026 05:09 PM

किसानों को राहत, ओले-बारिश से नहीं खराब हुई तिनके भर की फसल!

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। प्रदेश में इस साल रबी फसलों का अच्छा उत्पादन हुआ है। रबी के दौरान किसानों को प्राकृतिक आपदा से नहीं जूझना पड़ा है। ओले और बारिश से रबी फसलों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। यह बात हम नहीं, सरकार के राजस्व विभाग की रिपोर्ट कह रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी से 10 मार्च 2026 तक रबी फसलों में किसी मौसमी कारक से कोई खराबा अथवा नुकसान नहीं हुआ है। राजस्व विभाग ने अपनी रिपोर्ट आपदा प्रबंधन और सहायता विभाग को सौंप दी है। इस गिरदावरी रिपोर्ट में 30 जिलो में ओलावृष्टि, बेमौसमी बारिश और शीतलहर से फसली नुकसान का आंकड़ा शून्य बताया गया है। ऐसे में पीडि़त किसानों को सरकार से कितनी राहत मिल पायेगी, यह बात स्वत: ही समझी जा सकती है। गौरतलब है कि मार्च और चालू माह के दौरान रबी की चना, सरसों और गेहूं फसल में जमकर नुकसान हुआ है। सूत्रो ने बताया कि गेहूं की फसल में 75-100 प्रतिशत, चने में 60-70 फ ीसदी और सरसों में 40-45 फीसदी नुकसान शुरूआती सर्वे में समाने आया है। ऐसे में राजस्व विभाग की गिरदावरी रिपोर्ट पर सवाल उठना लाजिमी है। बता दें कि बारिश के कारण किसानों को एमएसपी में गेहूं बिक्री करने में दिक्कत आ रही है। भारत सरकार की फसल खरीद एंजेसी भारतीय खाद्य निगम ने गेहूं खरीद के मापदंड़ो में बदलाव किया है। अब सवाल यह उठता है कि जब रबी फसलों में प्राकृतिक आपदा से नुकसान हुआ ही नहीं तो गेहूं खरीद के नियमों में सरकार ने क्यों शिथिलता दी है। 

लडख़ड़ा गई गेहूं खरीद

न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीद की प्रक्रिया इस बार शुरुआत चरण में ही लडख़ड़ा गई है। कई केन्द्रों पर अब तक गेहूं का एक दाना भी नहीं खरीदा जा सका है। एमएसपी पर गेहूं का भाव 2735 रुपए प्रति क्विंटल तय है, जबकि स्थानीय मंडियों में आढ़ती 2300 से 2400 रुपए प्रति क्विंटल ही दे रहे हैं। मजबूरी में कई किसान औने-पौने दाम पर गेहूं बेचने को मजबूर हैं, जिससे उन्हें प्रति क्विंटल 300 से 400 रुपए तक का सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है।

खरीद नियमों में दी ढील

बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की मार झेल रहे किसानों के दर्द पर केंद्र सरकार ने मरहम लगाया है। चमकहीन, सिकुड़े और टूटे हुए दानों वाले गेहूं की खरीद के नियमों में ढील दी गई है। अब चमक में कमी वाले गेहूं की सीमा की छूट को प्रदेश में 50 फीसदी तक बढ़ाया है। वहीं सिकुड़े और टूटे हुए दानों की सीमा में छूट को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया है

उधर, केन्द्र ने राज्य सरकार को यह भी निर्देशित किया गया है कि शिथिल नियमों के तहत खरीदे गए गेहूं को अलग से भंडारित किया जाए। इसका उपभोग राज्य के भीतर ही किया जाएगा।

गेहूं खरीद की घटाया समय

राज्य सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीद प्रक्रिया को सरल बना दिया है। अब जो किसान ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण नहीं करवा पाते, वे खरीद केंद्र पर मौके पर ही रजिस्ट्रेशन कराकर गेहूं बेच सकेंगे। लेकिन, सरकार ने गेहूं खरीद के लिए पूर्व निर्धारित समयावधि को कम कर दिया है। अब किसान 31 मई तक ही फसल की बिक्री कर सकेें गे। जबकि, पहले 30 जून तक एमएसपी पर गेहूं की खरीद होनी थी। 

नई गाइडलादन में यह बात

हालांकि, किसानों की सुविधा के  लिए सरकार ने स्लॉट बुकिंग को बंद कर दिया है। अब पहले आओ, पहले पाओं के आधार पर किसानों से खरीद होगी।  टोकन अब खरीद केंद्रों की ओर से क्षेत्रीय कार्यालय की मंजूरी के बाद जारी किए जाएंगे, ताकि दैनिक क्षमता का पूर्ण उपयोग हो और किसानों को मंडी में इंतजार न करना पड़े। यदि कोई किसान बिना पंजीकरण के केंद्र पर पहुंचता है तो केंद्र प्रभारी को प्रतिदिन शाम 6 बजे के बाद कुल पंजीकृत किसानों के 10 प्रतिशत तक स्पॉट रजिस्ट्रेशन करने की अनुमति होगी। सह-खातेदारों और बटाईदारों के लिए नियम सरल किए गए हैं। अब भूमि मालिक या सह-खातेदार की सहमति जनआधार से जुड़े मोबाइल पर ओटीपी के माध्यम से ली जा सकेगी। यदि पंजीकरण के समय यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती तो खरीद केंद्र प्रभारी इसे पूरा कर सकेंगे। हालांकि, भुगतान केवल पंजीकृत किसान के जनआधार से लिंक बैंक खाते में ही किया जाएगा। मृतक किसानों के मामलों में वारिस, अपडेटेड जमाबंदी अपलोड कर उपज बेच सकेंगे। 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक अपनी ओर से किसी अन्य व्यक्ति को मनोनीत कर बायोमेट्रिक सत्यापन के माध्यम से फसल बेच सकेंगे। गिरदावरी के आधार पर उपज की सीमा तय की गई है। राउंड ऑफ के कारण यदि किसान के पास थोड़ी अतिरिक्त मात्रा बचती है तो केंद्र प्रभारी को निर्धारित सीमा से 5 प्रतिशत तक अधिक खरीद की अनुमति दी गई है।


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