एलपीजी की कमी से गहराएगा खाद संकट? सरकार ने किसानों के लिए कही ये बात
एलपीजी की कमी से गहराएगा खाद संकट? सरकार ने किसानों के लिए कही ये बात
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। यूरिया बनाने वाले प्लांट इस वक्त एक अभूतपूर्व संकट से गुजर रहे हैं। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण एलपीजी गैस की कमी हो गई है, जिससे देश के प्रमुख फर्टिलाइजर प्लांटों ने अपना उत्पादन आधा कर दिया है। इससे किसानों को खरीफ में यूरिया और डीएपी संकट से दो चार होना पड़ सकता है। हालांकि, केन्द्र और राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में उर्वरक की कोई कमी नहीं है। किसानों को खरीफ में कोई दिक्कत नहीं आने दी जायेगी। लेकिन, युद्ध लंबा खींचता है कि तो परेशानी तय है। बता दें कि प्रदेश में खरीफ फसलों की मांग को पूरा करने के लिए 11 लाख एमटी यूरिया, 5.10 लाख एमटी डीएपी और 4 लाख एमटी एसएसपी की जरूरत होगी। उधर, केन्द्र सरकार ने कहा है कि घरेलू स्तर पर यूरिया के उत्पादन में वृद्धि हुई है। पिछले एक दशक में यूरिया का घरेलू उत्पादन 230 लाख एमटी से बढक़र 315 लाख मीट्रिक टन हो गया है।
गैस सप्लाई में गिरावट
हॉर्मुज जलडमरूमध्य से कार्गो की आवाजाही रुकने के बाद विदेशी सप्लायरों ने फोर्स मेज्योर (अपरिहार्य परिस्थितियों में अनुबंध से छूट) लागू कर दिया है। इसका असर यह हुआ कि गेल, आईओसी, बीपीसीएल ने फर्टिलाइजर यूनिटों को दी जाने वाली गैस सप्लाई में 60-65 प्रतिशत की कटौती कर दी है। कुछ प्लांटों में तो प्रभावी सप्लाई 50 प्रतिशत से भी नीचे गिर गई है।
उत्पादन आधा, पर खर्च दोगुना
गैस की कमी ने प्लांट ऑपरेशंस को बुरी तरह प्रभावित किया है। बड़े अमोनिया-यूरिया प्लांट अपनी पूरी क्षमता पर चलने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। जब इन्हें कम क्षमता पर चलाया जाता है, तो ये कम यूरिया बनाने के लिए ज्यादा ऊर्जा खर्च करते हैं। गैस की मात्रा में अचानक बदलाव से उपकरणों के खराब होने और प्लांट के अचानक बंद (ट्रिपिंग) होने का डर बढ़ गया है।
क्या किसानों को होगी यूरिया की किल्लत ?
खरीफ बुवाई का मौसम नजदीक है, ऐसे में यूरिया उत्पादन में लंबी रुकावट चिंताजनक है। हालांकि, फिलहाल एक राहत की खबर भी है। मार्च तक देश के पास 61.14 लाख टन यूरिया का स्टॉक था, जो पिछले साल (55.22 लाख टन) के मुकाबले बेहतर है। लेकिन, अगर उत्पादन जल्द सामान्य नहीं हुआ, तो आने वाले महीनों में खाद की भारी कमी और कीमतें बढऩे का खतरा है।
प्रदेश में उर्वरक उपलब्धता
वर्तमान में राज्य में उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, जिसमें यूरिया 3.67 लाख मैट्रिक टन, डीएपी 0.82 लाख मैट्रिक टन, एनपीके 0.66 लाख मैट्रिक टन और एसएसपी 1.94 लाख मैट्रिक टन शामिल हैं।