नए कुलपति खोल पायेंगे गुरूजी का राज

नई दिल्ली 07-Nov-2025 11:14 AM

नए कुलपति खोल पायेंगे गुरूजी का राज

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर में नए कुलपति की नियुक्ति के बाद अब गुरूजी की चर्चा जोरो पर है। ये कौन थे, कौन चेला था और विश्वविद्यालय भर्ती में गुरूजी की क्या भूमिका रही। इसकों लेकर तरह-तरह की चर्चा सामने आ रही है। कहा जा रहा है कि राजभवन यदि गुरूजी की भूमिका की जांच करा लें पूर्व कुलपति के द्वारा शैक्षणिक पदों पर की गई भर्ती के जैसे ही एक बड़ी कहानी का पटाक्षेप हो सकता है। सूत्रों ने बताया कि वर्ष 2023 में विश्वविद्यालय में अशैक्षणिक पदों पर हुई भर्ती में पेपर सेटर से लेकर इंटरव्यू पैनल तक में गुरूजी का बोलबोला रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि अशैक्षणिक पदों पर हुई भर्ती का पेपर भी सेट हुआ, परीक्षा भी नियमानुसार ली गई। लेकिन, परीक्षा से पूर्व पेपर आउट भी हुआ (हलधर टाइम्स अपनी ओर से इस दांवे की पुष्टी नहीं करता है)। लेकिन, पेपर उन तक ही पहुंचा, जिनको परीक्षा की मैरिट में लाना था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि विश्वविद्यालय में नए कुलपति की नियुक्ति के बाद राजभवन इस मामले की जांच करायेगा अथवा नहीं। 


180 पदों पर हुई थी नियुक्ति
सूत्रों ने बताया कि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति के द्वारा वर्ष 2023 में शैक्षणिक पदों पर भर्ती के बाद अशैक्षणिक वर्ग के 180 पदों पर भर्ती निकाली गई थी। इनमें फार्म मैनेजर, तकनीक सहायक, एलडीसी, ड्राइवर, सुपरवाईजर, इलेक्ट्रिशियन, चपरासी, स्टेनो और कम्प्यूटर ऑपरेटर के पद शामिल थे। 


गुरूजी की भूमिका क्या
सूत्रों ने बताया कि उत्तरप्रदेश से ताल्लुक रखने वाले गुरूजी यानी एक प्रोफेसर ने अशैक्षणिक पदों पर हुई भर्ती में बड़ी जिम्मेदारी के साथ काम को ऐसा अंजाम दिया कि सरकार को इस भर्ती में हुई गडबड़ी की भनक तक नहीं लग पाई। सूत्रों ने बताया कि पेपर सेटर से लेकर इंटरव्यू के दौरान गुरूजी मौजूद रहे। ऐसे में समूची भर्ती प्रक्रिया पर अब सवाल उठने लगे है। ताकि, योग्य अभ्यर्थियों को मौका मिल सके। 


एसओजी से जांच क्यों नहीं
जिस प्रकार से शैक्षणिक और अशैक्षणिक पदों हुई भर्ती पर सवालिया निशान लग रहे है। इसको देखते हुए कहा जा सकता है कि सरकार को विश्वविद्यालय में वर्ष 2023 में हुई भर्ती की जांच एसओजी को सौंप देने चाहिए। ताकि, एसआई भर्ती के जैसे ही गुड खाने वाले गुरूजी का असली चेहरा सामने आ सके।