विजन 2047 राजस्थान: बढ़ती आबादी और सब्जी उत्पादन का रोडमैप

नई दिल्ली 29-Dec-2025 12:29 PM

विजन 2047 राजस्थान: बढ़ती आबादी और सब्जी उत्पादन का रोडमैप

(सभी तस्वीरें- हलधर)

पीयूष शर्मा

जयपुर। वैसे तो नया साल कोई पर्व नहीं है। लेकिन, फिर भी लोग महीनों पहले से इसके इंतेजार में रहते हैं। यह इंतेजार नई उम्मीदों का होता है। आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक रूप से विकास की नई राहें खुलने की उम्मीद होती है। आने वाले साल में 2026 में देश-प्रदेश विकास की क्या इबारत लिखी जायेगी। यह तो सरकार बताएंगी। लेकिन, नये साल में हम बात करेंगे विजन 2047 की। क्योंकि, इस समय तक प्रदेश की आबादी का आंकड़ा 10 करोड़ पार होने का अनुमान हैं। ऐसे में खाद्यान्न के साथ-साथ फल-सब्जी की मांग बढऩा भी तय है। संभव है कि बढ़ती आबादी का दबाव कृषि क्षेत्र पर भी देखने को मिले। क्योंकि, सपनों के एक घर की जरूरत सबको होती है। ऐसे में कृषि जोत का आकार घटने की भी पूरी संभावना है। गौरतलब है कि नीति आयोग के पत्र में इस बात का हवाला दिया जा चुका है कि वर्ष 2047 तक देश की कृषि जोत का आकार छोटा हो जायेगा। इस चुनौति से पार पाने और बढ़ती खाद्यान्न, फल-सब्जी, दुग्ध-मांग की मांग को पूरा करने के हमें सभी क्षेत्रो की उत्पादकता बढानी होगी। क्योंकि, विकसित भारत का रास्ता खेती-किसानी से तय होगा। इसके लिए प्रदेश की भजन सरकार ने भी वर्ष 2047 के लिए विक सित राजस्थान का रोडमैप तैयार किया है। इस रोड़मैप में कृषि क्षेत्र के लिए क्या लक्ष्य रखा है, कैसे राजस्थान विकसित बनेगा, इस लक्ष्य के लिए क्या आमूलचूूल बदलाव समय के साथ करने होंगे, विजन को धरातल देने के लिए हर साल क्या काम करना होगा आदि सवालों की बात करेंगे नये साल यानी वर्ष 2026 में। विजन 2047 यानी विकसित राजस्थान की शुरूआत हम सब्जी उत्पादन से करेंगे। क्योंकि, यह वह बुनियादी जरूरत है, जो अमीर और गरीब से सीधा ताल्लुक रखती है। 

बूंद-बूंद से भरेंगे घट

राज्य सरकार के थिंक टैंक द्वारा तैयार विकसित राजस्थान के ब्लूप्रिंट पर नजर डाले तो इसमें सब्जी फसलों की उत्पादकता बढाने के लिए वर्ष 2026 से ही बूंद-बूंद से घट भरे की तर्ज पर कार्य शुरू किया जाएगा। ताकि, वर्ष 2047 के विजन को धरातल दिया जा सके। गौरतलब है कि प्रदेश में सब्जी फसलों की उत्पादकता 12.16 एमटी प्रति हैक्टयर है। इसे वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 14.50 एमटी प्रति हैक्टयर करने का लक्ष्य है। 

2047 तक क्या होगी फल-सब्जी मांग

नीति पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2047 तक सब्जियों की मांग 2.3 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़कर 365 मिलियन टन हो जाएगी। लेकिन, दूसरी ओर, प्रति किसान औसत जोत का आकार वर्तमान लगभग एक हैक्टयर से घटकर केवल 0.6 हैक्टयर रह जाएगा। ऐसे में विकसित भारत और विकसित राजस्थान के लिए फसल उत्पादकता को बढाने महत्वपूर्ण होगा। क्योंकि, पिछले पांच दशकों में सूखा, लू और बाढ़ जैसी चरम मौसमी घटनाओं के चलते भारत की कृषि उत्पादकता में लगभग 25 प्रतिशत की गिरावट आई है। ऐसे में हाल वर्तमान जैसे ही बने रहे तो संभव है कि खाद्य सुरक्षा प्रभावित होगी। 

यह है वर्तमान स्थिति

उद्यानिकी विभाग के सब्जी उत्पादन के आंकड़ो पर गौर करें तो प्रदेश में 1.93 लाख हैक्टयर क्षेत्र में सब्जी फसलों का उत्पादन हो रहा है। इनमें प्याज, टमाटर, मटर, पत्तागोभी, फूलगोभी, बैंगन, टिंड़ा, भिंड़ी, लौकी, तुरई, खरबूज-तरबूज, करेला, खीरा, ककड़ी, पालक, मैथी, मिर्च, कद्दू, मूली, गाजर, ग्वारफली, अरबी आदि सब्जी फसलें शामिल है। सालाना 27.11 लाख एमटी सब्जी फसलों का उत्पादन प्रदेश में हो रहा है। 


ट्रेंडिंग ख़बरें