कद्दूवर्गीय सब्जियों के 13 प्रमुख रोग और आसान नियंत्रण उपाय
(सभी तस्वीरें- हलधर)कद्दूवर्गीय सब्जियों की उपलब्धता साल में लगभग 8-10 महीने रहती है। इनका उपयोग सलाद (खीरा, ककड़ी), सब्जी के रूप में (लौकी, तुरई, करेला, काशीफल, परवल, छप्पन कद्दू), मीठे फल के रूप में (तरबूज, खरबूजा), मिठाई बनाने में (पेठा, परवल, लौकी) और अचार बनाने में (करेला) प्रयोग किया जाता है। इन सब्जियों में कई प्रकार के रोग लगते हैं। जिससे इनकी उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
1. आर्द्रपतन
रोग का प्रकोप ज्यादा होने पर कैप्टान अथवा कॉपर ऑक्सीक्लोराइड से 2 ग्राम प्रति लीटर जल की दर से ड्रेचिंग करनी चाहिये।
2. शुष्क म्लानि, जड़गलन रोग
कार्बेन्डाजिम से 1.5 ग्राम प्रति लीटर जल की दर से ड्रेचिंग करनी चाहिये। खड़ी फसल पर मैंकोजेब का 0.2 प्रतिशत प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।
3. मृदुरोमिल असिता
खड़ी फसल पर मैंकोजेब का 0.2 प्रतिशत प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। अथवा दायथेन एम-45 अथवा दायथेन जेड-78 का 1-1.2 किग्रा प्रति हैक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिये।
4. चूर्णिल असिता
गंधकयुक्त कवकनाशी रसायन जैसे थायोविट अथवा सल्फेक्स का 1-1.2 किग्रा प्रति हैक्टेयर अथवा कैराथेन अथवा कैलेक्सीन का 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
5. श्यामवर्ण
कवकनाशी ब्लाइटोक्स-50 अथवा फाइटोलॉन अथवा डाईथेन एम-45 का एक ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल का 10-15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें।
6. पत्ती झुलसा
फसल पर इंडोफिल एम-45 का 2-3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर 10-15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें।
7. फल विगलन
डाईथेन एम-45 अथवा प्रोपिकोनाजोल 1 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर 10-15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें।
8. चारकोल
प्रोपिकोनाजोल 1 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
9. आल्टर्नेरिया पत्ती धब्बा
डायथेन एम-45 अथवा डाइफॉल्टान-80 घुलनशील चूर्ण अथवा डायथेन जेड-78 का 1-1.2 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर प्रति 500 लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें।
10. जीवाणु म्लानि
खेत में ब्लीचिंग पाउडर का 10 किग्रा प्रति हैक्टेयर की दर से प्रयोग करें।
11. कुकुम्बर मोजेक
इमिडाक्लोप्रिड 3.5 मिली प्रति 10 लीटर पानी में घोल बनाकर एक सप्ताह के अंतराल पर खड़ी फसल पर 2 बार छिड़काव करें।
12. कलिका नेक्रोसिस
इमिडाक्लोप्रिड 3.5 मिली प्रति 10 लीटर पानी की दर से घोल बनाकर 2 बार फसल पर छिड़काव करना चाहिए।
13. पर्ण कुंचन
ऐसिटामिप्रिड 20 घुलनशील चूर्ण का 60 ग्राम प्रति एकड़ की दर से 15 दिनों के अंतराल पर दो बार और प्रयोग करने पर रोग वाहक कीट का सर्वोत्तम नियंत्रण करता है।