गुलाब में थ्रिप्स, मोयला और छाछ्या का उपचार

नई दिल्ली 16-May-2026 05:16 PM

गुलाब में थ्रिप्स, मोयला और छाछ्या का उपचार

(सभी तस्वीरें- हलधर)

व्यावसायिक दृष्टि से देशी गुलाब एक महत्वपूर्ण पौधा है। इत्र, गुलकंद, गुलाब जल, गुलाब पत्ती का उपयोग होने से देशी फूल की अच्छी मांग है। उदयपुर के हल्दीघाटी क्षेत्र में रोजा डेमेसिना, अजमेर क्षेत्र में बोरबोनियाना और श्रीगंगानगर क्षेत्र में रोजा चाइनेनसिस किस्म को किसान लगाते है। इस फसल को कुछ कीट-रोग ज्यादा प्रभावित करते है। इससे उपज में नुकसान होता है। आलेख में कीट नियंत्रण की जानकारी दी गई है। 

  • स्केल कीट : पौधें के रोगग्रस्त भाग को कृन्तन कर नष्ट कर दें। मिथाइल डिमेटॉन 1 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। 
  • मोयला : नियंत्रण हेतु मैलाथियॉन 50 ईसी अथवा डाईमिथोएट 30 ईसी 1 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।
  • पर्णजीवी : मैलाथियॉन 50 ईसी अथवा डाईमिथोएट 30 ईसी 1 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।
  • तनाछेदक मक्खी : मैलाथियॉन 50 ईसी अथवा डाईमिथोएट 30 ईसी 1 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।
  • थ्रिप्स : डाइमिथोएट अथवा एसीफेट 5 मिली प्रति 10 लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें। 
  • स्पाइडर माइट : क्षतिग्रस्त भाग को काटकर जला दें। इथियॉन 5 मिली प्रति 10 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।रोग
  • छाछ्या : नियंत्रण हेतु कैराथेन एलसी 1 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर 10 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें। 
  • एन्थे्रक्नोज : सूखे भाग को काट कर हटा दें। इसमें बोर्डो मिश्रण अथवा गुलाब पेंट (कॉपर+ रेड लेड+ अलसी का तेल 4:4:5) के अनुपात में कटी टहनियों के सिरे पर लगा दें।


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