ईसबगोल फसल में ब्लाइट और मोयला कंट्रोल टिप्स
(सभी तस्वीरें- हलधर)ईसबगोल प्रमुख नकदी फसल है। जिसके बीज और हस्क का उपयोग औषधी के रूप में किया जाता है। किन्तु विभिन्न रोग-कीट के कारण इसकी उपज और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती है। आपको बता दें कि प्रदेश के बाड़मेर, जालौर, नागौर, जोधपुर, सिरोही, पाली सहित दूसरे जिलों में ईसबगोल का उत्पादन किसान करते हैं। आर्थिक दृष्टि से यह फसल किसानों के लिए ज्यादा लाभकारी है।
रोग प्रबंधन
अंगमारी (झुलसा, ब्लाइट): निदान के लिए 60 ग्राम मैंकोजेब को 300 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
उखटा (विल्ट): खड़ी फसल में रोग उपचार के लिए 2.5 किलो ट्राईकोडर्मा को 100 किलो सड़ी गोबर में मिलाकर प्रति हेक्टेयर की दर से भुरकाव करें।
कीट प्रबंधन
मोयला: नियंत्रण के लिए वानस्पतिक कीटनाशी जैसे नीम तेल 1-2 प्रतिशत, करंज तेल 1-2 प्रतिशत, नीम बीज अर्क 2-5 प्रतिशत का उपयोग प्रारंभिक अवस्था में करना चाहिए। नत्रजन उर्वरक की केवल निर्धारित मात्रा ही उपयोग में लेवें। ज्यादा उपयोग से कीटों का प्रकोप बढ़ता है। रासायनिक नियंत्रण में डाईमिथोएट 1 मिली अथवा इमिडाक्लोप्रिड 1 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। आवश्यकता होने पर 15 दिन बाद छिड़काव दोहरावें।
दीमक, उदई: खड़ी फसल में दीमक नियंत्रण के लिए क्लोरोपायरीफॉस 4 लीटर को सिंचाई जल के साथ एक हेक्टेयर फसल में देंवे। साथ ही, फिप्रोनिल 5 प्रतिशत एससी, 18 किलो दानदार को एक हेक्टेयर खड़ी फसल में डालना चाहिए।