किसानों के लिए अलर्ट खेत तैयारी के दौरान बढ़ा सफेद लट का प्रकोप
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। किसानों ने मंूगफली बुवाई को लेकर खेत तैयार करना शुरू कर दिया है। लेकिन, किसानों को थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि, इस फसल में बड़े पैमाने पर सफेद लट कीट का प्रकोप होता है। इससे उत्पादन में गिरावट आती है। साथ ही, आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। गौरतलब है कि बुवाई पूर्व बीजोपचार ही इस कीट से बचाव का एक मात्र उपाय है। उल्लेखनीय है कि मूंगफली और बाजरे में सफेद लट के कारण 50-70 फीसदी तक नुकसान संभव है। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि यदि किसान ने बिना बीजोपचार बीज बुवाई किया है तो सफेद लट से फसल को बचा पाना मुश्किल है। क्योंकि, जमीन मेें रहने वाली लट को मारना संभव नहीं है। गौरतलब है कि प्रदेश के हल्के बालू मिट्टी वाले क्षेत्रों में होलोट्राईकिया कन्सेनगिनिया नामक प्रजाति के भृंगों की सफेद लट फसल को ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। जिस खेत में मादा भृंग अण्डे देती है, वहां छोटे-छोटे गड्डे मिट्टी में नजर आने लगते है। अण्डों से लट निकलने के साथ ही यह फसल को चट करना शुरू कर देती है। सफेद लट से हुए नुकसान का अंदाजा लगाना किसान के लिए काफी मुश्किल है। क्योंकि, खेत में नमी रहने तक पौधा हरा नजर आता है। नमी खत्म होने के साथ ही पौधा सूखकर नष्ट हो जाता है।
सी जैसा आकार
सफेद लट का शरीर अंग्रेजी के सी अक्षर जैसा होता है। शिशु लट 10-12 मिमी लम्बी और 2-3 मिमी. चौड़ी होती है। जबकि, प्रौढ़ कीट काले, भूरे रंग का 18 मिमी. लम्बा और 7 मिमी चौड़ा होता है। इसका सिर, वक्ष और उदर विभक्त होता है। इसका अग्र पंख मोटे, सिर भूरे और जबडे मजबूत होते है।
यह करें किसान
पहली अच्छी वर्षा के बाद एक हैक्टयर में 5 फेरोमॉन ट्रेप और प्रबंधन के लिए प्रति हैक्टयर 12 ट्रेप लगाने चाहिए।
जैविक प्रबंधन: मेटाराइजियम और बिवेरिया बेसियाना जैविक मित्र कवक से भूमि उपचार करना चाहिए। वहीं, मिथोक्सी, बेंजीन, एनीसॉल नामक फेरोमोन का उपयोग करें। 10 सेमी. वर्गाकार 25-30 स्पंज के टुकड़ो को 1-2 मिनिट के लिए फेरोमोन के100 मिली घोल में भिगोएं। फिर स्पंज के 3-4 टुकड़े परपोषी वृक्षो की विभिन्न दिशा में टांग दें।
ऐसे करें बीजोपचार
परपोषी वृक्षों पर नियंत्रण
मानसून अथवा मानसून पूर्व की अच्छी बरसात के बाद इस कीट के भृंग भूमि से बाहर निकलकर आस-पास के परपोषी वृक्षों पर बैठते है। इनमें खेजड़ी, नीम, बेर, गूलर, सेंजना, गुलमोहर आदि वृक्ष शामिल है। पहले मादा भृंग जमीन से निकलकर नर भृंग को विशेष रसायन से अपनी ओर आकर्षित करती है। इसके बाद समागत करके नर और मादा भृंग जमीन में चले जाते है। यह प्रक्रिया करीब सप्ताह तक चलती है।
ऐसे करती है नुकसान
मादा भृंग समागम के 3-4 दिन बाद गीली मिट्टी में लगभग 8-10 सेमी की गहराई पर अंडे देना शुरू कर देती है। अंडे देने का क्रम एक से दो सप्ताह तक रह-रहकर चलता रहता है। दो सप्ताह के बाद अंडों से लट निकलती है। इसकी लम्बाई 15 मिमी. होती है। यह लटें पौधों की जड़ो को खाती है। इस अवस्था से लेकर लट का आकार बढ़ता जाता है। इस तरह 3-4 महीने तक सफेद लट फसल को नुकसान पहुंचाती है। इस कीट का सम्पूर्ण जीवनचक्र 130-150 दिन का होता है।