आलू प्रोसेसिंग यूनिट क्यों जरूरी? कोटा-भरतपुर की सच्चाई
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। प्रदेश के कोटा और भरतपुर संभाग में आलू की यूनिट प्रोसेसिंग नहीं होने से किसान केवल फसल होने पर उसे कोल्ड में रखवा देता है और कुछ फसल लोकल मंडी और फिर बाहर सप्लाई कर देता है। लेकिन, खेत से मंडी के बीच फसल बेचने के लिए उसे अड़तियों की मदद लेनी होती है। किसान को ज्यादा फायदा नहीं होता है। यूनिट लगने से किसान उसकी ग्रीडिंग, वॉश, कटिंग, बिक्री और पैकिजिंग इत्यादि करवा कर मार्केट में बेच कर बढिय़ा मुनाफा कमा सकते हैं। दिल्ली, मथुरा, आगरा में यूनिट के चलते वहां के किसान आलू की फसल पर अच्छे दाम उठा रहे हैं। गौरतलब है दोनों ही संभाग में आलू फसल का दायरा बढ़ता जा रहा है। क्योंकि, यहां पैदा होने वाले आलू में शुष्क पदार्थ ज्यादा है। इस कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियां किसानों से बाय बैक गांरटी के साथ प्रोसेसिंग के लिए उपयुक्त किस्मों का उत्पादन करवा रही है।
कोटा में कोल्ड स्टोर का भी अभाव
भारी मात्रा मैं पैदावार होने के बाद भी आलू के लिए कोई प्रोसेसिंग यूनिट नहीं है। हालांकि, धौलपुर जिले में उपज को सुरक्षित रखने के लिए करीब 35 कोल्ड स्टोरेज क्रियाशील है। लेकिन, कोटा संभाग में कोल्ड स्टारेज का भी अभाव किसानों को झेलना पड़ रहा है।
पंच गौरव योजना में आलू
राज्य सरकार ने प्रत्येक जिले के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए पंच गौरव योजना शुरू की है। इसमें धौलपुर से आलू की फसल को शामिल किया है। इसकी मुख्य वजह से आलू की फसल पर विशेष ध्यान देने और उत्पादन बढ़ाने के लिए आलू का किसानों को अच्छा भाव दिलाना है। जिले में 2023-24 में करीब 5,521 हैक्टयर में 1,09,370 टन उत्पादन हुआ था।