वैज्ञानिकों ने बताया, असली-नकली कीटनाशक पहचान का तरीका
(सभी तस्वीरें- हलधर)श्रीगंगानगर! केंद्रीय टिड्डी सह एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, सूरतगढ़ द्वारा 24 एपीडी ग्राम सेवा सहकारी समिति पर किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया! कार्यक्रम के दौरान किसानों को असली और नकली कीटनाशकों की पहचान का तरीका बताया गया! वैज्ञानिक सहायक पूरण भादू ने बताया कि कीटनाशक खरीद के समय पैकिंग सील पर ध्यान दें!पैकिंग के साथ लीफलेट मौजूद होनी चाहिए! हर कीटनाशक के पीछे लिखी पंजीकरण संख्या और बैच नंबर असली कीटनाशक की पहचान है, पंजीकरण संख्या को सीआईबीआरसी की वेबसाइट पर दर्ज कर चेक किया जा सकता है।अथवा कीटनाशक के पीछे दिये गये क्यूआर कोड और बार कोड को स्कैन कर भी उसके बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि किसान कीटनाशक की मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट जरूर देखें और जीएसटी बिल अवश्य लें । कार्यक्रम में 50किसानों ने भाग लिया!
ट्राइकोडर्मा से बीज-भूमि उपचार
वैज्ञानिक सहायक जयंत हुड्डा ने किसानों को बताया कि जैविक मित्र फफूंद ट्राइकोडर्मा का उपयोग करके उखेड़ा ,जडग़लन, टिंडा गलन से फसलों को बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग अंतिम उपाय के रूप में करें। फसलों की बुआई से पूर्व किसान शत-प्रतिशत बीज उपचार करें।
मित्र कीटों की पहचान
तकनीकी सहायक गजानन गिजे ने कहा कि यदि कीटनाशकों का उपयोग सीमित मात्रा में किया जाए तो खेतों में मौजूद मित्र कीटों को संरक्षित किया जा सकता है। यह मित्र कीट हानिकारक कीटों को अपना भोजन बनाते हैं।
खरीफ फसलों के रोग-कीट की जानकारी दी
कार्यक्रम में किसानों को खरीफ फसलों में लगने वाले कीट और रोग, विशेषकर कपास की फसल में नुकसान पहुंचाने वाली गुलाबी सुंडी की सभी अवस्थाओं के बारे में बताया गया! साथ ही निगरानी और रोकथाम के उपाय बताये गए!