किसान ने बदली खेती की तस्वीर, 8 बीघा से 6 लाख कमाई

नई दिल्ली 01-Sep-2026 12:00 PM

किसान ने बदली खेती की तस्वीर, 8 बीघा से 6 लाख कमाई

(सभी तस्वीरें- हलधर)

नारायणगंज, राजसमंद। प्रकृति ने मौसम के हर रंग में किसान को खुशहाल रहने की सौगात दी है। फिर, चाहे जोत का आकार छोटा हो या बड़ा। आय को अपने मेहनत के हिसाब से नया रंग दिया जा सकता है। आइए आपको रूबरू कराते है किसान जगदीश चंद्र तेली से। जिन्होंने वैज्ञानिक तकनीक और जैविक सब्जी उत्पादन के सहारे आमदनी को दोगुना कर दिखाया है। इससे खेती से सालाना लाभ 5-6 लाख रूपए तक पहुंच चुका है। किसान जगदीश ने हलधर टाइम्स को बताया कि 10वीं पास करने के साथ ही स्कूल छोड़ दिया। पिताजी के साथ खेती के काम में हाथ बंटाते-बंटाते खेतों का होकर रह गया। उन्होंने बताया कि मेरे पास 8 बीघा जमीन है। जमीन के इस रकबे से पहले लाख से डेढ़ लाख रूपए की आमदनी मिलती थी। इस स्थिति को देखते हुए कृषि विज्ञान के न्द्र से जुड़ा। प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। फिर, वैज्ञानिक तौर-तरीके से परम्परागत फसलो का उत्पादन लेना शुरू किया। जिस फसल से अच्छी आमदनी मिली, उस फसल का दायरा बढ़ाना शुरू किया। परिणाम रहा कि जमीन के मौजूदा रक बे से आमदनी बढक़र मिलने लगी। इसके बाद आय बढ़ाने और लागत घटाने के लिए जैविक सब्जी फसलों का रूख किया। इससे भी अच्छी आमदनी मिल रही है। उन्होंने बताया कि सिंचाई के लिए मेरे पास कुआं और जल बचत के लिए पाइपलाइन और फव्वारा सेट है। परम्परागत फसलो में कपास और सरसों फसल की ज्यादा बुवाई करता हॅू। क्योंकि, इनसे आमदनी अच्छी मिलती है। इसके अलावा मक्का, गेहूं, का उत्पादन लेता हॅू। इन फलसों से सालाना दो लाख रूपए की आमदनी हो जाती है। 

सब्जी से डेढ़ लाख

उन्होंने बताया कि सब्जी फ सलों में करेला, भिंड़ी, तुरई, लौकी, बैंगन, ग्वार और मिर्च आदि फसलों का उत्पादन लेता हूूॅ। इन फसलों के उत्पादन से सालाना डेढ़ से पौने दो लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। 

मिश्रित बागवानी

उन्होने बताया कि टिकाऊ आय के लिए खेत में 10-10 की संख्या में अमरूद, जामुन, अनार, पपीता, नींबू के पौधें लगाएं हुए है। इनमें से अनार-नींबू और पपीता से उत्पादन मिल रहा है। सालाना 35-40 हजार रूपए की आमदनी फल उत्पादन से मिल रही है। 

उन्नत पशुपालन

उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास 1 भैंस, 3 गाय और एक बैल की जोड़ी है। प्रतिदिन 20 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल जाता है। इसमें से एक समय का दुग्ध 50 रूपए प्रति लीटर की दर से बिक्री कर देता हॅू। घरेलू उपयोग के बाद बचे दुग्ध से घी तैयार करता हॅू। इससे पशुधन और परिवार का खर्च निकल जाता है। पशु अपशिष्ट का उपयोग जैविक खाद और जैव कीटनाशी बनाने में कर रहा हॅू। 

स्टोरी इनपुट: डॉ. पीसी रैगर, केवीके, राजसमंद


ट्रेंडिंग ख़बरें