कमज़ोर मानसून से कपास की बुवाई घटी, बढ़े भाव

नई दिल्ली 20-Jul-2026 02:49 PM

कमज़ोर मानसून से कपास की बुवाई घटी, बढ़े भाव

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। कमजोर मानसून का असर अब मंडियों में साफ दिखाई देने लगा है। बाजार में कपास की कीमतों में करीब 800 रुपये प्रति कैंडी तक की तेजी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो कपास का बुवाई रकबा और उत्पादन प्रभावित होना तय है। बता दें कि राजस्थान में इस बार कपास का रकबा घटने की पूरी संभावना है। पिछले साल करीब सवा सात लाख हैक्टयर क्षेत्र में कपास की बुवाई दर्ज हुई थी। लेकिन, इस साल अब तक सवा पांच लाख हैक्टयर क्षेत्र में कपास की बुवाई दर्ज हुई है। जबकि, बुवाई का समय निकल चुका है। ऐसे में अब बुवाई क्षेत्र बढने की संभावना कम हैं। क्योंकि, कृषि विभाग द्वारा जारी बुवाई के आंकडो में पिछले सप्ताह से इस सप्ताह तक कपास बुवाई क्षेत्र में कोई बड़ा फेरबदल देखने को नहीं मिला है। बता दें कि इस साल अलनीनो का साफ असर मानसून पर देखने को मिल रहा है। 

समय पर बुवाई नहीं

कपास की बुवाई प्रदेश ही नहीं, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, और तेलंगाना जैसे प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में भी पिछड़ गई है। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने के कारण किसान समय पर बुवाई नहीं कर पाए। यही वजह है कि टेक्साइल इंडस्ट्रीज और बाजार में भविष्य के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई के अंत तक अच्छी बारिश नहीं होती है तो कपास की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उत्पादन कम होने की आशंका के कारण अभी से मंडियों में तेजी का माहौल बना हुआ है।

800 रुपये प्रति कैंडी की तेजी

हालिया बाजार रिपोर्ट के अनुसार कपास के भाव में करीब 800 रुपये प्रति कैंडी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। घरेलू टेक्सटाइल उद्योग की मांग लगातार बनी हुई है, जबकि दूसरी ओर उत्पादन कम रहने की संभावना बाजार को समर्थन दे रही है। व्यापारियों का मानना है कि यदि मानसून सामान्य नहीं हुआ तो कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।

किसानों को कितना फायदा

कपास की कीमतों में बढ़ोतरी उन किसानों के लिए अच्छी खबर है जिनकी फसल अभी अच्छी स्थिति में है। उन्हें बेहतर बाजार भाव मिलने की संभावना बढ़ गई है। हालांकि जिन क्षेत्रों में बारिश की कमी से फसल प्रभावित हुई है, वहां उत्पादन कम रहने के कारण लाभ सीमित हो सकता है।


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