आईसीएआर का हेलो-मिक्स बना किसानों के लिए नई उम्मीद

नई दिल्ली 27-Jul-2026 03:59 PM

आईसीएआर का हेलो-मिक्स बना किसानों के लिए नई उम्मीद

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के द्वारा कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित तकनीक को यू ही किसानों के लिए मैदान में नहीं उतारा जाता है। गहन परीक्षण और उत्पाद की प्रभावशीलता जांचने के बाद ही कोई तकनीक किसान तक पहुंचती है। सीएसएसआरआई, करनाल के क्षेत्रीय केन्द्र लखनऊ के द्वारा तैयार जैव रसायन उत्पाद हेलो मिक्स को ही देख लिजिए। 3500 हैक्टयर भूमि उपचार के बाद तैयार उत्पाद का आईसीएआर ने बाजारीकरण किया है। प्रधान वैज्ञानिक संजय अरोड़ा ने बताया कि हेलो मिक्स ऐसा जैव- फार्मूलेशन है, जो ना केवल लवणीय और क्षारीय जमीन की सूरत बदलता। बल्कि, फसल की सीरत बदलकर आय बढौत्तरी का सबब है। इनमें बनासकांठा कोऑपरेटिव लि. पालनपुर ओर त्रिशिका आर्गेनिक बायोफ र्टिलाइजऱ लखनऊ शामिल है। एमओयू के तहत कम्पनियों को कमर्शियल उत्पादन लाइसेंस सौंपा गया। इस मौके पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट और संस्थान के निदेशक डॉ सतीश सवाल मौजूद रहे। 

यह है उत्पादकी खासियत

तरल जैव फार्मूलेशन हेला-मिक्स में लवण सहिष्णु जीवाणुओं की उचित संख्या होती है। जो वातावरण में उपस्थित नाईट्रोजन को एकत्र कर पौध वृद्धि करते है। साथ ही, इस फार्मूलेशन में फास्फोरस घुलनशीलता में वृद्धि करने वाले लवण सहिष्णु जीवाणु है। यह जीवाणु मृदा में उपस्थित अघुलनशील सूक्ष्म पोषक तत्व जस्ते(जिंक) को घुलनशील कर पौधों को उपलब्ध कराते है। इन जीवाणुओं से फसल की ना केवल उपज बढ़ती है। 

नाइट्रोजन की होती है बचत

धान, गेहूं, चारा, सब्जी फसलों के साथ-साथ तिलहनी फसलों में इस जैव फार्मूलेशन के उपयोग से 15-20 किलोग्राम नाइट्रोजन, 10-15 किग्रा. फास्फोरस और 2-4किग्रा. जिंक प्रति हैक्टयर की बचत होती है। इससे ऊसर मृदा में फसलों पर वातावरण का अनुकूल प्रभाव भी पड़ता है। इसके जीवाणु पौध जड़ क्षेत्र के आसपास की मृदा में रासायनिक पोषक तत्व उपलब्ध कराने के साथ जड़ो को कवक जनित बीमारियों से भी बचाते है।

प्रदेश के किसानों के लिए फायदेमंद

गौरतलब है कि प्रदेश में 10.62 लाख हैक्टयर भूमि लवणीयता और क्षारीयता से ग्रस्त है। इसके कारण किसानों को रबी-खरीफ फसलों का अपेक्षित उत्पादन नहीं मिल पाता है। कृषि विभाग के आंकड़ो पर गौर करें तो प्रदेश में 6.43 लाख हैक्टयर क्षेत्र क्षारीयता के तहत आता है। शेष, भूमि लवणीयता से ग्रस्त है। जबकि, देश में 7 मिलियन हैक्टयर ज़मीन लवण से प्रभावित है। 

यह रहे परीक्षण परिणाम

डॉ. अरोड़ा ने बताया कि हैलो-मिक्स तरल जैव फार्मूलेशन के प्रयोग से धान और गेहूं की फसल में क्रमश: 11.5 और 14.03 प्रतिशत तक वृद्धि पायी गई है। साथ ही, ऊसर मृदा का पीएच मान में 9.7 से 8.9 तक की कमी दर्ज हुई है। किसानों आय के आधार पर धान की फसल में 2.31 और गेहूं में 2.59 प्रतिशत तक औसत वृद्धि देखने को मिली है।

100 एमएल ही काफी

उन्होंने बताया कि हेलो मिक्स की उपयोग दर प्रति एकड़ 100 एमएल है। किसानों को इस जैव फार्मूलेशन से बीजोपचार करना होगा। इस फार्मूलेशन का उपयोग धान, गेहूं, सरसों, बैंगन, फूलगोभी, मटर, टमाटर और गन्ना सहित दूसरी फसलों में किया जा सकता है


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