पिछले साल के मुकाबले चीनी उत्पादन में भारी बढ़त, इतने लाख टन पहुंचा आंकड़ा
पिछले साल के मुकाबले चीनी उत्पादन में भारी बढ़त, इतने लाख टन पहुंचा आंकड़ा
(सभी तस्वीरें- हलधर)भारत का चीनी उद्योग इस समय एक दोराहे पर खड़ा है। एक तरफ जहां देश में चीनी के उत्पादन में शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर आर्थिक तंगहाली और परिचालन संबंधी चुनौतियों ने उद्योग की चिंताएं बढ़ा दी हैं। दरअसल, चीनी सीजन 2025-26 में 30 अप्रैल 2026 तक देश में कुल चीनी उत्पादन 275.28 लाख टन तक पहुंच गया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के 256.49 लाख टन के मुकाबले करीब 7 प्रतिशत अधिक है। इस बढ़ते उत्पादन के बीच उद्योग ने अपनी चिंताओं को भी दोहराया है।
इंडियन शुगर एंड बायोएनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। ताकि मिलों को आर्थिक राहत मिल सके और उद्योग संतुलन में बना रहे।
वहीं, एक और अहम पहलू यह भी है कि उत्पादन बढ़ने के बावजूद मिलों की संख्या में कमी आई है। फिलहाल देश में केवल 5 चीनी मिलें ही चालू हैं, जबकि पिछले साल इस समय 19 मिलें चल रही थी।
चीनी उद्योग ने की MSP बढ़ाने की मांग
चीनी उत्पादन का सीजन खत्म होने के साथ ही अब उद्योग सरकार पर चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य बढ़ाने का दबाव बना रहा है। इससे वजह से साफ है कि उत्पादन की लागत बढ़ गई है लेकिन मिलों को मिलने वाली कीमत उतनी नहीं बढ़ी है। इससे चीनी मिलों की आर्थिक हालत पर असर दिखाई दे रहा है और उनके पास नकदी की कमी हो रही है। इसी वजह से किसनों का गन्ना भुगतान भी समय पर नहीं हो पा रहा है और बकाया बढ़ता जा रहा है।
इंडियन शुगर एंड बायोएनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन का कहना है कि अगर MSP को समय पर बढ़ाया जाए तो मिलों की आर्थिक स्थिति में सुधर हो सकता है। किसानों को समय पर भुगतान मिल सकेगा और बाजार में स्थिरता बनी रहेगी, वो भी सरकार पर बेफिजुल का बोझ डाले बिना ।